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Akal Bodhon

Assamese

अन्य नाम: Akal Bodhan, Devi Jagran

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Akal Bodhon
2026 Assamese तिथि

Akal Bodhon

Akal Bodhon के बारे में

अकाल बोधन देवी दुर्गा के अनुष्ठानिक जागरण का पर्व है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। असम में यह भव्य दुर्गा पूजा उत्सव के आरंभ का प्रतीक है और देवी की दिव्य शक्ति के आवाहन को दर्शाता है।

अकाल बोधन के दिन घरों में पूजा कक्ष की सफाई की जाती है और देवी दुर्गा के लिए वेदी सजाई जाती है। पुरोहित औपचारिक पूजा आरंभ होने से पहले कलश (पवित्र घट) में देवी का आवाहन करते हुए कल्पारंभ अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। यह विधि दुर्गा पूजा का पहला औपचारिक चरण मानी जाती है।

भक्त नवान्न चावल, सब्जियों और मिठाइयों से बना विशेष भोग अर्पित करते हैं। संध्या आरती अत्यंत भक्तिभाव से की जाती है, और ढाक (पारंपरिक ढोल) की ध्वनि वातावरण में गूंजती है, जो चार दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव के शुभारंभ का संकेत देती है।

व्रत विधि और उपवास नियम

अकाल बोधन में दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारी और अनुष्ठानिक शुद्धता का एक दिन शामिल होता है।

संकल्प मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे, मैं रक्षा और समृद्धि के लिए देवी दुर्गा की दिव्य शक्ति का आवाहन करता/करती हूं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले जागें और अनुष्ठानिक स्नान करें।
  • पूजा कक्ष की सफाई करें और देवी दुर्गा के लिए वेदी तैयार करें।
  • देवी को पुष्प, धूप और भोग अर्पित करें।
  • मिट्टी के दीपक जलाएं और भक्तिभाव से संध्या आरती करें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
दुर्गा प्रतिमा या चित्रजल से भरा कलश (पवित्र घट)आम के पत्ते और नारियललाल पुष्प और मालाअगरबत्ती और मिट्टी के दीपकमिठाई और नवान्न चावल
पूजा प्रक्रिया:
  1. पूजा स्थान को साफ करें और साफ वस्त्र से वेदी सजाएं।
  2. जल से भरा कलश रखें और उसे आम के पत्तों से सजाएं।
  3. दुर्गा सप्तशती मंत्रों का जाप करते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें।
  4. पुष्प और भोग अर्पित करें तथा संध्या आरती करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: अकाल बोधन का महत्व क्या है?

अकाल बोधन देवी दुर्गा के अनुष्ठानिक जागरण का प्रतीक है और असम में दुर्गा पूजा उत्सव के आरंभ का संकेत देता है।

प्रश्न: अकाल बोधन कब मनाया जाता है?

यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को, मुख्य दुर्गा पूजा के दिनों से ठीक पहले मनाया जाता है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।