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Uttarayana

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अन्य नाम: Uttarayan Period

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Uttarayana
2026 Gujarati तिथि

Uttarayana

Uttarayana के बारे में

उत्तरायण सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है, जो मकर संक्रांति (14 जनवरी) से आरंभ होती है। यह आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत शुभ काल है।

गुजरात में यह पूरा काल पतंग उड़ाने से चिह्नित होता है, जो मकर संक्रांति पर अपने चरम पर पहुँचता है। शीतकाल का स्वच्छ आकाश इसके लिए उत्तम परिस्थितियाँ प्रदान करता है।

यह छह महीने की अवधि धार्मिक अनुष्ठानों, दान और आध्यात्मिक साधनाओं के लिए अनुकूल है। इस काल में नए उपक्रम शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

उत्तरायण का महत्व इसलिए भी है क्योंकि महाभारत के भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर अपना पार्थिव शरीर त्यागने के लिए इसी शुभ काल की प्रतीक्षा की थी।

व्रत विधि और उपवास नियम

कोई विशेष व्रत नहीं; यह आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए शुभ काल है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • धार्मिक अनुष्ठान करें।
  • नए उपक्रम शुरू करें।
  • दान व आध्यात्मिक साधना में संलग्न हों।
  • मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाकर उत्सव मनाएं।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: लागू नहीं।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
फूलअगरबत्तीदीयाचावल के दाने
पूजा प्रक्रिया:
  1. मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा करें।
  2. इस काल में नए उपक्रम शुरू करें।
  3. दान करें।
  4. परिवार और समुदाय के साथ उत्सव मनाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: यह क्या है?

छह महीने की वह अवधि जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर गति करता है, जो मकर संक्रांति से आरंभ होती है। अत्यंत शुभ।

प्रश्न: यह क्यों महत्वपूर्ण है?

आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल। भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने के लिए इसी काल की प्रतीक्षा की थी।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।