देव दीपावली, जिसे देव दिवाली या त्रिपुरोत्सव भी कहा जाता है, कार्तिक पूर्णिमा को वाराणसी और अन्य पवित्र नगरों में मनाया जाने वाला एक भव्य पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस रात्रि स्वयं देवगण गंगा में स्नान करने और असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाने के लिए धरती पर उतरते हैं।
यह पर्व त्रिपुरासुर की कथा से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है - तीन असुर नगरियाँ, जिन्हें भगवान शिव ने एक ही बाण से नष्ट किया था। इस कार्य से शिव को त्रिपुरारि नाम मिला, और उनके सम्मान में कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा से पूर्व दस दिनों तक वाराणसी के घाट अनगिनत मिट्टी के दीयों से जगमगाते हैं, जिससे गंगा के किनारे प्रकाश की एक नदी बहती प्रतीत होती है। भक्त पवित्र स्नान करते हैं, गंगा महात्म्य का पाठ करते हैं, और नदी को दीपदान (तैरते दीप) अर्पित करते हैं। इसकी दृश्य भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण देव दीपावली को हिंदू पंचांग के सबसे मनोहर आयोजनों में से एक बनाते हैं।