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मौनी अमावस्या

त्यौहार

अन्य नाम: Mauni Amavas, Mauni Ama

त्वरित जानकारी

2026 में तारीख
रविवार, 18 जनवरी 2026
तिथि
माघ कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
12:05 am, 18 जन॰ से 01:22 am, 19 जन॰ तक
चंद्र मास
माघ · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Mauni Amavas
2026 पर्व तिथि और मुहूर्त

मौनी अमावस्या

रविवार, 18 जनवरी 2026

चंद्र मास: माघ

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:12:05 am, 18 जन॰
तिथि समाप्ति:01:22 am, 19 जन॰

मौनी अमावस्या: मुख्य तथ्य

मौनी अमावस्या का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग पौष कृष्ण अमावस्या कहता है।

तिथि नियम
माघ कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)कृष्ण अमावस्यामाघ मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Pitra · Purna Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
अर्धोदय योगमहोदय योग

इस दिन का पंचांग

मौनी अमावस्या · 18 जन॰ 2026

वाररविवार
तिथिअमावस्या अमावस्या12:05 am → 01:22 am
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा08:12 am → 10:14 am
योगहर्षण
करणचतुष्पाद
चंद्र मासपौष
ब्रह्म मुहूर्त05:26 am → 06:20 am
अभिजित मुहूर्त12:10 pm → 12:52 pm
निशिता मुहूर्त12:04 am → 12:58 am
राहु काल04:29 pm → 05:48 pm

मौनी अमावस्या के बारे में

मौनी अमावस्या माघ माह में मनाई जाने वाली एक अत्यंत आध्यात्मिक अमावस्या है, जो कुंभ मेले के चक्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। 'मौनी' शब्द 'मौन' से बना है, जिसका अर्थ है खामोशी, और इस दिन की मुख्य साधना आंतरिक शुद्धि और आत्म-संयम के साधन के रूप में पूर्ण मौन धारण करना है।

हिंदू परंपरा के अनुसार, गंगा, यमुना, गोदावरी और कावेरी जैसी पवित्र नदियों का जल मौनी अमावस्या पर विशेष रूप से शक्तिशाली हो जाता है। इस दिन पवित्र स्नान (मौनी स्नान) करने से अनगिनत पापों का नाश होता है और पूर्वजों को नकारात्मक लोकों से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है।

मौन का अभ्यास केवल वाणी का अभाव नहीं है; यह इंद्रियों के प्रत्याहार और चेतना को आत्मा (आत्मन) की ओर अंतर्मुखी करने का प्रतीक है। कई संत और साधु इस दिन को ध्यान, मंत्र-जप और मन के कोलाहल से परे जाने के एक शक्तिशाली अवसर के रूप में मनाते हैं।

मौनी अमावस्या सूर्य, पूर्वजों और भगवान विष्णु की पूजा से भी जुड़ी है। उत्तर भारत में इसे वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण स्नान-दिवसों में से एक माना जाता है, जो लाखों तीर्थयात्रियों को पवित्र नदी-तटों पर अनुष्ठानिक स्नान और दान के लिए आकर्षित करता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्तगण मौन धारण करते हैं, पवित्र स्नान करते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि तथा पूर्वजों के लिए तर्पण एवं दान करते हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले जागें और पवित्र नदी में, या घर पर गंगाजल से, शुद्धिकारक स्नान करें।
  • जागने से लेकर सूर्यास्त तक या पूरे दिन पूर्ण मौन (मौन व्रत) धारण करें।
  • काले तिल, कुशा घास और जल से पूर्वजों का तर्पण करें।
  • फूलों, धूप और दीपों से भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करें।
  • दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करें, या फल-दूध का उपवास रखें।
  • निर्धनों और जरूरतमंदों को कंबल, भोजन और आवश्यक वस्तुएं दान करें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
गंगाजल या पवित्र जलकाले तिल और कुशा घासफूल, विशेषकर लाल और पीलेतुलसी पत्र और चंदन का लेपधूप, घी का दीपक और कपूरअर्पण और दान के लिए सात्विक भोजन
पूजा प्रक्रिया:
  1. पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ और शांत स्थान पर ध्यान के लिए बैठें।
  2. उगते सूर्य को लाल फूलों और तिल मिश्रित जल से अर्घ्य अर्पित करें।
  3. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दिवंगत पूर्वजों के नाम का जाप करते हुए पितृ तर्पण करें।
  4. तुलसी पत्र और पंचामृत अर्पित करते हुए मौन रहकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
  5. मौन बनाए रखें और मानसिक रूप से शास्त्र-पाठ या मंत्र-जप करें।
  6. ब्राह्मणों या निर्धनों को दान और भोजन कराकर दिन का समापन करें।

व्रत कथा: मौन के द्वारा मुक्ति पाने वाला शिकारी

बहुत समय पहले एक शिकारी रहता था, जो वन में पशुओं का वध करके अपनी जीविका चलाता था। उसके पाप गहराते गए, और मृत्यु के बाद वह घोर दुख में फंस गया।

एक दिन, दैवी कृपा से, वह धर्म के अल्प ज्ञान के साथ मनुष्य रूप में पुनर्जन्म लिया। मौनी अमावस्या के दिन वह भटकते हुए एक वन में पहुंचा और एक अकथनीय आकर्षण से एक वृक्ष के नीचे मौन बैठ गया।

पूरे दिन वह मौन रहा, अनजाने में ही मौन-व्रत का पालन करते हुए। उसका मन धीरे-धीरे स्थिर हो गया, और उस दिन की दैवी कृपा ने उसके संचित कर्मों को शुद्ध कर दिया।

जब उसका देहांत हुआ, तो दिव्य प्राणी प्रकट हुए और उसे उच्च लोकों में ले गए। मौनी अमावस्या की शक्ति ने, अनजाने में पालन किए जाने पर भी, उसे मुक्ति प्रदान की।

मौनी अमावस्या: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: मौनी अमावस्या किस तिथि को मनाया जाता है?

माघ कृष्ण अमावस्या (अमांत पंचांग में पौष कृष्ण अमावस्या); स्वामी Pitra, Purna Tithi।

प्रश्न: 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण अमावस्या: 12:05 am, रवि, 18 जन॰ 2026 से 01:22 am, सोम, 19 जन॰ 2026 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: मौनी अमावस्या की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

अर्धोदय योग और महोदय योग (माघ कृष्ण अमावस्या)।

प्रश्न: मौनी अमावस्या में 'मौनी' का क्या अर्थ है?

'मौनी' का अर्थ है मौन (खामोशी)। भक्तगण मन को शांत करने और चेतना को अंतर्मुखी करने के लिए वाणी का मौन धारण करते हैं।

प्रश्न: क्या मौनी अमावस्या पर स्नान करना अनिवार्य है?

पवित्र नदी में स्नान करने की अत्यधिक सिफारिश की जाती है। यदि यह संभव न हो, तो घर पर गंगाजल से और सच्ची श्रद्धा के साथ स्नान करना भी लाभकारी है।

प्रश्न: क्या मौनी अमावस्या के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग किया जा सकता है?

परंपरागत पालन में वाणी के पूर्ण मौन और न्यूनतम इंद्रिय-संलग्नता को प्रोत्साहित किया जाता है। कई भक्त आंतरिक शांति बनाए रखने के लिए डिजिटल उपकरणों से भी परहेज करते हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।