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विवाह पंचमी

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2041 में तारीख
बुधवार, 27 नवंबर 2041
तिथि
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
07:47 pm, 27 नव॰ से 06:09 pm, 28 नव॰ तक
चंद्र मास
मार्गशीर्ष · शुक्ल पक्ष
इसी तिथि पर
नाग पंचमी
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Vivah Panchami
2041 पर्व तिथि और मुहूर्त

विवाह पंचमी

बुधवार, 27 नवंबर 2041

चंद्र मास: मार्गशीर्ष

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:07:47 pm, 27 नव॰
तिथि समाप्ति:06:09 pm, 28 नव॰

विवाह पंचमी: मुख्य तथ्य

विवाह पंचमी का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी (पाँचवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी (पूर्णिमांत)शुक्ल पंचमीमार्गशीर्ष मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Naga · Purna Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
नाग पंचमी

आने वाले वर्षों में मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
204209:31 pm, मंगल, 16 दिस॰08:57 pm, बुध, 17 दिस॰
204305:27 am, रवि, 6 दिस॰07:09 am, सोम, 7 दिस॰
204404:21 am, गुरु, 24 नव॰07:03 am, शुक्र, 25 नव॰
204509:32 pm, मंगल, 12 दिस॰11:59 pm, बुध, 13 दिस॰
204609:09 pm, शनि, 1 दिस॰09:29 pm, रवि, 2 दिस॰

इस दिन का पंचांग

विवाह पंचमी · 27 नव॰ 2041

वारबुधवार
तिथिशुक्ल चतुर्थी09:11 pm → 07:47 pm
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा03:56 pm → 03:16 pm
योगगण्ड
करणविष्टि (भद्रा)
चंद्र मासमार्गशीर्ष
ब्रह्म मुहूर्त05:05 am → 05:59 am
अभिजित मुहूर्त11:47 am → 12:29 pm
निशिता मुहूर्त11:42 pm → 12:36 am
राहु काल12:08 pm → 01:27 pm

विवाह पंचमी के बारे में

विवाह पंचमी भगवान राम और देवी सीता के दिव्य विवाह का उत्सव है, जो मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को संपन्न हुआ था। यह हिंदू परंपरा में सर्वाधिक श्रद्धेय विवाह वर्षगांठों में से एक है।

यह पर्व मिथिला (जनकपुर), सीता की जन्मभूमि, तथा अयोध्या, राम की नगरी, में विशेष महत्व रखता है। मंदिरों में विवाहोत्सव का पुनराभिनय किया जाता है, और श्रद्धालु धर्म, प्रेम तथा पारस्परिक सम्मान पर आधारित इस आदर्श राजसी विवाह का स्मरण करते हैं।

विवाहित दंपत्तियों के लिए, विवाह पंचमी मनाने से दांपत्य बंधन सुदृढ़ होते हैं तथा सुखी, कर्तव्यपूर्ण गृहस्थ जीवन के लिए सीता-राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित लोग भी एक धर्मपरायण जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

श्रद्धालु व्रत रखते हैं, सीता-राम की प्रतिमाओं का विवाह समारोह संपन्न करते हैं, तथा रामचरितमानस से विवाह-प्रसंग का पाठ करते हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले स्नान करें और परिवार के कल्याण के लिए व्रत रखने का संकल्प लें।
  • सजी हुई वेदी पर भगवान राम, देवी सीता, भगवान लक्ष्मण तथा भगवान हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित करें।
  • दिव्य दंपत्ति को हल्दी, सिंदूर और चंदन लगाएं तथा नए वस्त्र, पुष्प और मिठाइयां अर्पित करें।
  • रामचरितमानस या रामायण के विवाह-प्रसंग का पाठ करें और विवाह गीत गाएं।
  • सुहासिनी पूजा के लिए विवाहित महिलाओं को आमंत्रित करें, उन्हें भोजन कराएं और उपहार दें; समारोह के बाद व्रत खोलें।

व्रत कथा: राम और सीता का दिव्य विवाह

मिथिला के राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी भगवान शिव के शक्तिशाली धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही उनकी पुत्री सीता का वरण करेगा। अनेक राज्यों के राजकुमारों ने प्रयास किया, परंतु असफल रहे।

जब भगवान राम ने सहजता से धनुष उठा लिया, तो वह गड़गड़ाहट के साथ टूट गया। जनक ने हर्षपूर्वक सीता को राम को सौंप दिया, और विवाह निश्चित हुआ।

मार्गशीर्ष की शुभ पंचमी को, जनकपुर में यह राजसी विवाह संपन्न हुआ, जिसने सूर्यवंश तथा पृथ्वी देवी को एक ऐसे बंधन में जोड़ा जिसे तभी से आदर्श विवाह के रूप में मनाया जाता है।

विवाह पंचमी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: विवाह पंचमी किस तिथि को मनाया जाता है?

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी; स्वामी Naga, Purna Tithi।

प्रश्न: 2041 में विवाह पंचमी की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल पंचमी: 07:47 pm, बुध, 27 नव॰ 2041 से 06:09 pm, गुरु, 28 नव॰ 2041 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2042 में विवाह पंचमी की तिथि कब है?

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी: 09:31 pm, मंगल, 16 दिस॰ 2042 से 08:57 pm, बुध, 17 दिस॰ 2042 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: विवाह पंचमी की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

नाग पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी)।

प्रश्न: क्या विवाह पंचमी केवल विवाहित लोगों के लिए है?

यह विवाहित दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, परंतु अविवाहित श्रद्धालु भी एक सद्गुणी जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करते हैं।

प्रश्न: विवाह पंचमी सबसे भव्य रूप से कहां मनाई जाती है?

नेपाल का जनकपुर तथा भारत की अयोध्या दिव्य विवाह के भव्य पुनराभिनय का आयोजन करते हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।