Gowatsa Dwadashi
Nepaliअन्य नाम: Govatsa Dwadashi

Gowatsa Dwadashi
Gowatsa Dwadashi के बारे में
गोवत्स द्वादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि (अक्टूबर-नवंबर) को पड़ती है और गायों व बछड़ों की पूजा को समर्पित है।
श्रद्धालु गायों और उनके बछड़ों को विशेष प्रार्थना व भोजन अर्पित करते हैं, तथा दूध के माध्यम से मिलने वाले पोषण के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं।
यह पर्व हिंदू परंपरा में गायों की पवित्र भूमिका पर बल देता है।
व्रत विधि और उपवास नियम
श्रद्धालु हल्का व्रत रखते हैं और गायों व बछड़ों की पूजा करते हैं।
- जल्दी उठकर गौ पूजा की तैयारी करें।
- गायों और बछड़ों को स्नान कराकर सजाएं।
- गायों को विशेष व्यंजन और प्रार्थना अर्पित करें।
- परिवार और पड़ोसियों के साथ उत्सव का भोजन साझा करें।
पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: गौ पूजा के बाद उत्सव के भोजन के साथ व्रत खोला जाता है।
पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण
- गायों और बछड़ों को स्नान कराकर सजाएं।
- गायों को चारा, व्यंजन और प्रार्थना अर्पित करें।
- दूध और घी अर्पित करते हुए पूजा करें।
- प्रसाद वितरित करें और उत्सव का भोजन साझा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह गायों और बछड़ों को दूध के माध्यम से मिलने वाले पोषण के लिए आभार व्यक्त करने का दिन है।
टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।
आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।
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