Mokshada Ekadashi
Nepaliअन्य नाम: Baikuntha Ekadashi

Mokshada Ekadashi
Mokshada Ekadashi के बारे में
मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास (नवंबर-दिसंबर) के पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और उनके दिव्य आशीर्वाद की कामना के लिए मनाई जाती है।
पद्म पुराण के अनुसार, यह एकादशी व्रत रखने से भक्त पापों से मुक्त होते हैं तथा आध्यात्मिक पुण्य और मोक्ष प्राप्त करते हैं।
भक्त कठोर व्रत रखते हैं, विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं और दिन को प्रार्थना व ध्यान में व्यतीत करते हैं। विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है।
व्रत विधि और उपवास नियम
आदर्श रूप से बिना अन्न-जल के कठोर व्रत रखा जाता है।
- भोर से पहले पवित्र स्नान करें।
- विष्णु सहस्रनाम का जाप करें और प्रार्थना अर्पित करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और नकारात्मक विचारों से बचें।
- दिन को प्रार्थना और ध्यान में व्यतीत करें।
पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है।
पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण
- फूलों और तुलसी पत्रों से विष्णु वेदी सजाएं।
- भगवान विष्णु को पंचामृत और पवित्र जल अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम का जाप करें और आरती करें।
- भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।
आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।
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