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Sri Guru Hargovind Ji Prakasha Parva Tithi

Sikh

अन्य नाम: Guru Hargobind Prakash Utsav

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Sri Guru Hargovind Ji Prakasha Parva Tithi
2026 Sikh तिथि

Sri Guru Hargovind Ji Prakasha Parva Tithi

Sri Guru Hargovind Ji Prakasha Parva Tithi के बारे में

प्रकाश पर्व सिख धर्म के छठे गुरु, गुरु हरगोविंद जी (1595-1644) के जन्म का पर्व है, जिनका जन्म अमृतसर में हुआ था। उन्हें 'मीरी और पीरी के स्वामी' के रूप में जाना जाता है — जिन्होंने आध्यात्मिक सत्ता (पीरी) को लौकिक शक्ति (मीरी) के साथ संयोजित किया। उनके युग ने सिख धर्म में एक मौलिक परिवर्तन को चिह्नित किया, क्योंकि समुदाय ने मुगल उत्पीड़न से स्वयं की रक्षा हेतु मार्शल परंपरा को अपनाया।

अपने पिता गुरु अर्जन देव जी की शहादत के बाद, गुरु हरगोविंद जी ने दो तलवारें धारण कीं — एक मीरी (लौकिक शक्ति) की प्रतीक और दूसरी पीरी (आध्यात्मिक सत्ता) की प्रतीक। उन्होंने हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त (कालातीत के सिंहासन) का निर्माण करवाया, जिससे सिख लौकिक सत्ता की पीठ स्थापित हुई। उन्होंने एक स्थायी सेना बनाए रखी, शिकार अभियानों पर गए, और राजसी वैभव के साथ जीवन व्यतीत किया — यह सब यह दर्शाने हेतु था कि सिख समुदाय स्वयं और अपनी आस्था की रक्षा करने में सक्षम है।

प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाएँ, अखंड पाठ, कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु गुरु हरगोविंद जी द्वारा सिख धर्म के क्रांतिकारी रूपांतरण और अकाल तख्त की स्थापना पर चिंतन करते हैं। यह दिवस उस साहस और दूरदृष्टि के प्रति भक्ति और कृतज्ञता के साथ मनाया जाता है, जिसने सिख समुदाय को एक निर्भीक, मार्शल आध्यात्मिक परंपरा के रूप में गढ़ा।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह दिवस अखंड पाठ, प्रार्थना, कीर्तन और लंगर के साथ मनाया जाता है, जो गुरु हरगोविंद जी की मार्शल और आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • गुरुद्वारे में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में सम्मिलित हों।
  • अखंड पाठ में भाग लें या गुरु ग्रंथ साहिब के अंशों का श्रवण करें।
  • गुरु हरगोविंद जी की मीरी-पीरी की अवधारणा और अकाल तख्त की स्थापना पर चिंतन करें।
  • सेवा भाव से लंगर में सहयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: मीरी-पीरी क्या है?

मीरी-पीरी लौकिक सत्ता (मीरी) और आध्यात्मिक सत्ता (पीरी) के संयोजन को दर्शाती है। गुरु हरगोविंद जी ने नेतृत्व के इन दोनों पहलुओं का प्रतीक स्वरूप दो तलवारें धारण कीं।

प्रश्न: अकाल तख्त क्या है?

अकाल तख्त (कालातीत के सिंहासन) सिख लौकिक सत्ता की पीठ है, जिसे गुरु हरगोविंद जी ने अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने स्थापित किया।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।