मुख्य सामग्री पर जाएँ
Yoga Panchang
लॉग इन करें

Dipabali

Bengali

अन्य नाम: Deepavali, Diwali

कैलेंडर वर्ष चुनें
Dipabali
2026 Bengali तिथि

Dipabali

Dipabali के बारे में

दीपाबली या दीपावली, बंगाल में कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीपों का पर्व है। जहाँ भारत के अन्य भागों में दिवाली का केंद्र लक्ष्मी पूजा होती है, वहीं बंगाल में मुख्य रूप से काली पूजा ही इस उत्सव का केंद्रबिंदु होती है।

यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। घरों की सफाई की जाती है और उन्हें मिट्टी के दीयों, मोमबत्तियों और रंगोली से सजाया जाता है। अमावस्या की रात का अंधकार हज़ारों टिमटिमाते दीपों से दूर हो जाता है।

बंगाल में इस संध्या पर पंडालों और घरों में भव्य काली पूजा का आयोजन किया जाता है। आतिशबाज़ी से आकाश जगमगा उठता है, और परिवार उत्सव के भोज तथा मिठाइयों एवं उपहारों के आदान-प्रदान के लिए एकत्र होते हैं।

यह दिन व्यापारिक समुदायों के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जो अपने बही-खातों की पूजा करके समृद्धि की कामना करते हैं। घरों और गलियों की रोशनी पूरे बंगाल में एक मनमोहक वातावरण बना देती है।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त दीपाबली पर उपवास रखते हैं, जो मुख्यतः काली पूजा के अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • दिन में उपवास रखें और संध्या पूजा के बाद उसे तोड़ें।
  • घर की सफाई करें और उसे मिट्टी के दीयों तथा मोमबत्तियों से सजाएँ।
  • पंडालों में होने वाली काली पूजा के उत्सव में भाग लें।
  • परिवार और पड़ोसियों के साथ मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: काली पूजा के पश्चात प्रसाद और उत्सव की मिठाइयों के साथ व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
मिट्टी के दीये और मोमबत्तियाँरंगोली बनाने की सामग्रीफूल और मालाएँअगरबत्ती और कपूरमिठाइयाँ और फल
पूजा प्रक्रिया:
  1. घर की सफाई करें और द्वार पर रंगोली बनाएँ।
  2. घर के भीतर और आँगन में मिट्टी के दीये जलाएँ।
  3. संध्या के समय काली पूजा या लक्ष्मी पूजा करें।
  4. पड़ोसियों के साथ मिठाइयों और पटाखों का आदान-प्रदान करें।
  5. परिवार के साथ उत्सव का भोजन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: दीपाबली अन्य राज्यों की दिवाली से किस प्रकार भिन्न है?

बंगाल में दीपाबली का केंद्र लक्ष्मी पूजा के बजाय काली पूजा होती है। यहाँ माँ काली की आराधना और अमावस्या की रात के अंधकार को दूर करने पर विशेष बल दिया जाता है।

प्रश्न: मिट्टी के दीये जलाने का क्या महत्व है?

मिट्टी के दीये जलाना अंधकार पर प्रकाश की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इससे माँ लक्ष्मी को स्वच्छ और प्रकाशमान घरों में आने का मार्ग मिलता है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।