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Dattatreya Jayanti

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अन्य नाम: Datta Jayanti, Dattatreya Purnima

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Dattatreya Jayanti
2026 Gujarati तिथि

Dattatreya Jayanti

Dattatreya Jayanti के बारे में

दत्तात्रेय जयंती भगवान दत्तात्रेय के जन्म का उत्सव है, जिन्हें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। यह मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को पड़ती है।

भगवान दत्तात्रेय को सभी गुरुओं के गुरु और त्रिदेव के अवतार के रूप में पूजा जाता है। भक्त उपवास रखते हैं और ज्ञान तथा आध्यात्मिक विकास के आशीर्वाद के लिए विशेष पूजा करते हैं।

यह त्योहार महाराष्ट्र और गुजरात में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां हजारों भक्त दत्तात्रेय मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।

दत्तात्रेय जयंती दिव्य त्रिमूर्ति की एकता और आध्यात्मिक जीवन में गुरु के महत्व का प्रतीक है।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त उपवास रखते हैं और भगवान दत्तात्रेय की पूजा करते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • कठोर उपवास रखें।
  • दत्तात्रेय मंत्र का जाप करें।
  • दत्तात्रेय मंदिरों में दर्शन करें।
  • गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: पूजा पूर्ण करने के बाद व्रत खोलें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
दत्तात्रेय प्रतिमाफूलफलदीयेअगरबत्तीगुरु की तस्वीर
पूजा प्रक्रिया:
  1. पूजा स्थल की सफाई और सजावट करें।
  2. दत्तात्रेय प्रतिमा स्थापित करें।
  3. फूल और फल अर्पित करें।
  4. दीये और अगरबत्ती जलाएं।
  5. दत्तात्रेय मंत्र का जाप करें।
  6. परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?

भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का संयुक्त स्वरूप, जिन्हें सभी गुरुओं के गुरु के रूप में पूजा जाता है।

प्रश्न: दत्तात्रेय जयंती मनाने का क्या लाभ है?

यह ज्ञान, आध्यात्मिक विकास और दिव्य त्रिमूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।