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Krishnapingala Sankashta

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अन्य नाम: Krishnapingala Ganesh Chaturthi

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Krishnapingala Sankashta
2026 Gujarati तिथि

Krishnapingala Sankashta

Krishnapingala Sankashta के बारे में

कृष्णपिंगल संकष्टी एक मासिक संकष्टी चतुर्थी है, जो भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप को समर्पित है — यह श्याम वर्ण का स्वरूप शत्रुओं तथा विघ्नों के नाशक के रूप में प्रतिष्ठित है।

भक्त कठोर व्रत रखते हैं और शत्रुओं से सुरक्षा तथा गंभीर विघ्नों के निवारण हेतु प्रार्थना करते हैं। यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है।

कृष्णपिंगल स्वरूप को नकारात्मक प्रभावों को निष्प्रभावी करने तथा शत्रुओं से रक्षा करने में विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है।

इस मासिक व्रत में शत्रुओं के नाश तथा परिवार को हर प्रकार की हानि से बचाने हेतु विशेष प्रार्थनाएँ की जाती हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें।
  • कठोर उपवास रखें।
  • पूजा हेतु गणेश मंदिर जाएँ।
  • चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत खोलें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
गणेश प्रतिमामोदकदूर्वालाल पुष्पकुमकुमअगरबत्ती
पूजा प्रक्रिया:
  1. पूजा स्थल की सफाई करें।
  2. गणेश प्रतिमा स्थापित करें।
  3. मोदक, दूर्वा और लाल पुष्प अर्पित करें।
  4. कुमकुम लगाएँ और आरती करें।
  5. चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: कृष्णपिंगल का क्या अर्थ है?

श्याम वर्ण का ऐसा स्वरूप जो शत्रुओं का नाश करता है और गंभीर विघ्नों को दूर करता है।

प्रश्न: इसका क्या लाभ है?

यह नकारात्मक प्रभावों को निष्प्रभावी करता है और शत्रुओं से रक्षा करता है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।