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Sita Navami

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अन्य नाम: Sita Jayanti

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Sita Navami
2026 Gujarati तिथि

Sita Navami

Sita Navami के बारे में

सीता नवमी भगवान राम की पत्नी और भक्ति, सदाचार तथा शक्ति की प्रतीक देवी सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह चैत्र या वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है।

भक्त व्रत रखते हैं और सदाचार, भक्ति तथा वैवाहिक सामंजस्य के आशीर्वाद के लिए देवी सीता की विशेष पूजा करते हैं। यह व्रत पारंपरिक विधि-विधान से मनाया जाता है।

यह पर्व गुजरात में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ परिवार भक्तिभाव और पारंपरिक समारोहों के साथ देवी सीता के जन्मोत्सव को मनाने के लिए एकत्रित होते हैं।

सीता नवमी एक स्त्री के जीवन में सदाचार, भक्ति और शक्ति के महत्व का प्रतीक है।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त व्रत रखते हैं और देवी सीता की पूजा करते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • कठोर व्रत रखें।
  • रामायण का पाठ करें।
  • भक्तिपूर्वक देवी सीता की पूजा करें।
  • सदाचार और भक्ति के लिए प्रार्थना करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: पूजा पूर्ण होने के बाद व्रत खोलें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
सीता-राम प्रतिमाफूलफलदीयेअगरबत्तीरामायण ग्रंथ
पूजा प्रक्रिया:
  1. पूजा स्थान की सफाई और सजावट करें।
  2. सीता-राम प्रतिमा स्थापित करें।
  3. फूल और फल अर्पित करें।
  4. दीये और अगरबत्ती जलाएं।
  5. रामायण के अंशों का पाठ करें।
  6. परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: देवी सीता कौन हैं?

भगवान राम की पत्नी, जो भक्ति, सदाचार और शक्ति की प्रतीक हैं।

प्रश्न: सीता नवमी मनाने का क्या लाभ है?

इससे सदाचार, भक्ति और वैवाहिक सामंजस्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।