Vikata Sankashta
Gujaratiअन्य नाम: Vikata Ganesh Chaturthi

Vikata Sankashta
Vikata Sankashta के बारे में
विकट संकष्टी एक मासिक संकष्टी चतुर्थी है, जो भगवान गणेश के विकट स्वरूप को समर्पित है, जिसका अर्थ है 'अद्भुत अथवा चमत्कारी', जो गणेश जी की चमत्कार करने की शक्ति का प्रतीक है।
भक्त कठोर व्रत रखते हैं और असंभव प्रतीत होने वाली समस्याओं के चमत्कारी समाधान हेतु प्रार्थना करते हैं। यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि विकट स्वरूप निराशाजनक प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में हस्तक्षेप करते हैं और चमत्कारी समाधान तथा दिव्य सहायता प्रदान करते हैं।
इस मासिक व्रत में अत्यंत कठिन समय में चमत्कारी दिव्य सहायता का आह्वान करने हेतु विशेष प्रार्थनाएँ की जाती हैं।
व्रत विधि और उपवास नियम
भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं।
- प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें।
- कठोर उपवास रखें।
- पूजा हेतु गणेश मंदिर जाएँ।
- चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत खोलें।
पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण
- पूजा स्थल की सफाई करें।
- गणेश प्रतिमा स्थापित करें।
- मोदक, दूर्वा और लाल पुष्प अर्पित करें।
- कुमकुम लगाएँ और आरती करें।
- चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत खोलें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
अद्भुत अथवा चमत्कारी, जो गणेश जी की चमत्कार करने की शक्ति का प्रतीक है।
इससे असंभव समस्याओं का चमत्कारी समाधान प्राप्त होता है।
टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।
आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।
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