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बलराम जयंती

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2032 में तारीख
शुक्रवार, 10 सितंबर 2032
तिथि
भाद्रपद शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
12:04 pm, 10 सित॰ से 12:41 pm, 11 सित॰ तक
चंद्र मास
भाद्रपद · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Balarama Jayanti
2032 पर्व तिथि और मुहूर्त

बलराम जयंती

शुक्रवार, 10 सितंबर 2032

चंद्र मास: भाद्रपद

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:12:04 pm, 10 सित॰
तिथि समाप्ति:12:41 pm, 11 सित॰

बलराम जयंती: मुख्य तथ्य

बलराम जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी (छठी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
भाद्रपद शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)शुक्ल षष्ठीभाद्रपद मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Kartikeya · Nanda Tithi

आने वाले वर्षों में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203303:04 pm, मंगल, 30 अग॰05:23 pm, बुध, 31 अग॰
203406:19 am, सोम, 18 सित॰08:48 am, मंगल, 19 सित॰
203504:04 am, शुक्र, 7 सित॰05:21 am, शनि, 8 सित॰
203609:04 am, मंगल, 26 अग॰08:08 am, बुध, 27 अग॰
203707:07 am, सोम, 14 सित॰05:19 am, मंगल, 15 सित॰

इस दिन का पंचांग

बलराम जयंती · 10 सित॰ 2032

वारशुक्रवार
तिथिशुक्ल पंचमी10:51 am → 12:04 pm
नक्षत्रस्वाती02:48 am → 04:45 am
योगवैधृति
करणबालव
चंद्र मासभाद्रपद
ब्रह्म मुहूर्त04:31 am → 05:17 am
अभिजित मुहूर्त11:52 am → 12:42 pm
निशिता मुहूर्त11:54 pm → 12:41 am
राहु काल10:44 am → 12:17 pm

बलराम जयंती के बारे में

बलराम जयंती भगवान बलराम के दिव्य अवतरण का उत्सव है, जो भगवान कृष्ण के बड़े भाई तथा शेषनाग, उस ब्रह्मांडीय सर्प के शक्तिशाली अवतार हैं जिस पर भगवान विष्णु शयन करते हैं। वसुदेव और देवकी से जन्मे तथा नंद और यशोदा द्वारा गोकुल में पालित, बलराम को आध्यात्मिक शक्ति, कृषि समृद्धि तथा दिव्य सुरक्षा के स्रोत के रूप में पूजा जाता है। उन्हें हल तथा मूसल धारण किए हुए दिखाया जाता है, जो कृषि, उर्वरता तथा धर्म के देवता के रूप में उनकी भूमिका का प्रतीक है।

यह पर्व परंपरागत रूप से श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो अक्सर रक्षाबंधन तथा भारत के कई भागों में फसल कटाई के मौसम के आरंभ के साथ मेल खाता है। केरल में, यह दिन तिरुप्रांगोड शिव मंदिर तथा अन्य वैष्णव तीर्थस्थलों में विशेष भव्यता के साथ बलराम जयंती के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में, यह पर्व मानसून की फसल कटाई की कृषि भावना के साथ मेल खाता है।

बलराम को बलदेव, बलभद्र तथा हलधर के नाम से भी जाना जाता है। ओडिशा की जगन्नाथ परंपरा में, बलभद्र को जगन्नाथ (कृष्ण) तथा सुभद्रा के साथ तीन प्रमुख देवताओं में से एक के रूप में पूजा जाता है। उनकी जयंती किसानों के लिए अपने औजारों को सम्मानित करने, वर्षा और फसल के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने, तथा आगामी परिश्रम के लिए शक्ति माँगने का समय है। भक्त विशेष व्यंजन तैयार करते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, तथा बलराम के वीरतापूर्ण कार्यों की कथाएँ सुनाते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

इस शुभ पूर्णिमा पर भक्त उपवास रखते हैं, भगवान बलराम की पूजा करते हैं, तथा कृषि एवं पशुपालन जीवन को सम्मानित करते हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, तथा स्वच्छ, संभवतः पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
  • आंशिक अथवा पूर्ण उपवास रखें, केवल संध्या पूजा तथा प्रसाद वितरण के पश्चात ही व्रत खोलें।
  • अपने हल और मूसल धारण किए भगवान बलराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, प्रायः कृष्ण के साथ।
  • देवता को ताजा मक्खन, दूध, मिष्ठान्न, मौसमी फल तथा तुलसी दल अर्पित करें।
  • श्रीमद्भागवत से बलराम के जन्म तथा उनके पराक्रम का वर्णन करने वाली प्रार्थनाओं का पाठ करें।
  • किसान सम्मानस्वरूप अपने हल तथा कृषि उपकरणों की विधिवत सफाई और पूजा कर सकते हैं।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
हल और मूसल धारण किए बलराम की प्रतिमाताजा मक्खनदूध और दहीतुलसी दलपीले पुष्पचंदन का लेपधूप और दीपकमिष्ठान्नफल
पूजा प्रक्रिया:
  1. पूजा स्थल की सफाई करें और बलराम तथा कृष्ण की देवता-प्रतिमा स्थापित करें।
  2. आचमन, संकल्प तथा पंचामृत अथवा सुगंधित जल से अभिषेक करें।
  3. ताजा मक्खन, दूध, मिष्ठान्न, तुलसी दल तथा पीले पुष्प अर्पित करें।
  4. धूप तथा घी का दीपक जलाएँ, बलराम स्तोत्र का पाठ करें, तथा आरती करें।
  5. परिवार तथा अतिथियों में मक्खन आधारित मिष्ठान्न तथा फलों का प्रसाद वितरित करें।

व्रत कथा: भगवान बलराम का अवतरण

जब अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी तथा उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद किया, तो एक दिव्य भविष्यवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का विनाश करेगी।

ब्रह्मांडीय व्यवस्था की रक्षा के लिए, परम भगवान के व्यक्तिगत अंश शेषनाग ने देवकी के गर्भ में उनकी सातवीं संतान के रूप में प्रवेश किया।

भगवान की योगमाया द्वारा, बलराम को देवकी के गर्भ से चमत्कारिक रूप से गोकुल में रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित किया गया, जहाँ उनका जन्म हुआ और वे कृष्ण के प्रिय बड़े भाई के रूप में पालित हुए।

बलराम बड़े होकर शक्ति, न्यायप्रियता तथा भक्ति के प्रतिमूर्ति बने, गोपसमुदाय की रक्षा करते हुए तथा कृष्ण के दिव्य कार्य में उनकी सहायता करते हुए।

बलराम जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: बलराम जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी; स्वामी Kartikeya, Nanda Tithi।

प्रश्न: 2032 में बलराम जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल षष्ठी: 12:04 pm, शुक्र, 10 सित॰ 2032 से 12:41 pm, शनि, 11 सित॰ 2032 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2033 में बलराम जयंती की तिथि कब है?

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी: 03:04 pm, मंगल, 30 अग॰ 2033 से 05:23 pm, बुध, 31 अग॰ 2033 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: क्या बलराम जयंती रक्षाबंधन के समान है?

ये अक्सर एक ही श्रावण पूर्णिमा को पड़ते हैं, लेकिन बलराम जयंती विशेष रूप से बलराम के जन्म का उत्सव है, जबकि रक्षाबंधन भाई-बहन के बंधन पर केंद्रित है।

प्रश्न: बलराम हल से क्यों जुड़े हैं?

बलराम कृषि और उर्वरता के देवता हैं। उनका हल पृथ्वी को जोतने, कृषि को बनाए रखने, तथा अपार शारीरिक व आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक के रूप में उनकी भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्न: बलराम को कौन से भोजन अर्पित किए जाते हैं?

ताजा मक्खन, दूध, दही, चावल के व्यंजन तथा गुड़ व तिल से बने मिष्ठान्न बलराम को विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।