मुख्य सामग्री पर जाएँ
Yoga Panchang
लॉग इन करें

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव)

त्यौहार

अन्य नाम: Deva-Deepavali(Tripurotsava)

त्वरित जानकारी

2030 में तारीख
शनिवार, 9 नवंबर 2030
तिथि
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
07:03 am, 09 नव॰ से 09:00 am, 10 नव॰ तक
चंद्र मास
कार्तिक · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Deva-Deepavali(Tripurotsava)
2030 पर्व तिथि और मुहूर्त

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव)

शनिवार, 9 नवंबर 2030

चंद्र मास: कार्तिक

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:07:03 am, 09 नव॰
तिथि समाप्ति:09:00 am, 10 नव॰

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव): मुख्य तथ्य

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा (पूर्णिमांत)शुक्ल पूर्णिमाकार्तिक मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Chandra · Purna Tithi

आने वाले वर्षों में कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203103:53 am, शुक्र, 28 नव॰04:49 am, शनि, 29 नव॰
203202:03 pm, मंगल, 16 नव॰12:12 pm, बुध, 17 नव॰
203305:40 am, रवि, 6 नव॰02:02 am, सोम, 7 नव॰
203407:57 am, शनि, 25 नव॰04:02 am, रवि, 26 नव॰
203510:06 pm, बुध, 14 नव॰07:19 pm, गुरु, 15 नव॰

इस दिन का पंचांग

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) · 9 नव॰ 2030

वारशनिवार
तिथिपूर्णिमा पूर्णिमा07:03 am → 09:00 am
नक्षत्रअश्विनी10:41 am → 12:50 pm
योगव्यतीपात
करणविष्टि (भद्रा)
चंद्र मासकार्तिक
ब्रह्म मुहूर्त04:53 am → 05:46 am
अभिजित मुहूर्त11:43 am → 12:26 pm
निशिता मुहूर्त11:38 pm → 12:31 am
राहु काल09:21 am → 10:43 am

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) के बारे में

देव दीपावली, जिसे देव दिवाली या त्रिपुरोत्सव भी कहा जाता है, कार्तिक पूर्णिमा को वाराणसी और अन्य पवित्र नगरों में मनाया जाने वाला एक भव्य पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस रात्रि स्वयं देवगण गंगा में स्नान करने और असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाने के लिए धरती पर उतरते हैं।

यह पर्व त्रिपुरासुर की कथा से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है - तीन असुर नगरियाँ, जिन्हें भगवान शिव ने एक ही बाण से नष्ट किया था। इस कार्य से शिव को त्रिपुरारि नाम मिला, और उनके सम्मान में कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा से पूर्व दस दिनों तक वाराणसी के घाट अनगिनत मिट्टी के दीयों से जगमगाते हैं, जिससे गंगा के किनारे प्रकाश की एक नदी बहती प्रतीत होती है। भक्त पवित्र स्नान करते हैं, गंगा महात्म्य का पाठ करते हैं, और नदी को दीपदान (तैरते दीप) अर्पित करते हैं। इसकी दृश्य भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण देव दीपावली को हिंदू पंचांग के सबसे मनोहर आयोजनों में से एक बनाते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

देव दीपावली गंगा में स्नान, दीपों की पंक्तियाँ जलाने और कार्तिक मास के व्रतों के समापन के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • कार्तिक मास के दौरान प्रातःकाल स्नान, दीप अर्पण और गंगा महात्म्य या विष्णु सहस्रनाम के पाठ की अनुशासित दिनचर्या का पालन करें।
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठें और गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करें।
  • पुष्प, चंदन, अगरबत्ती और अनेक घी के दीपों के साथ गंगा पूजा करें।
  • सायंकाल देवताओं का स्वागत करने के लिए द्वारों, आँगनों और यदि संभव हो तो नदी किनारों पर दीये जलाएँ।
  • पूर्वजों और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हुए नदी को तैरते हुए दीप अर्पित करें।
  • कार्तिक व्रत का समापन करने के लिए ब्राह्मणों, संतों और निर्धनों को भोजन कराएँ तथा प्रसाद वितरित करें।

देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव): अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) किस तिथि को मनाया जाता है?

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा; स्वामी Chandra, Purna Tithi।

प्रश्न: 2030 में देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल पूर्णिमा: 07:03 am, शनि, 9 नव॰ 2030 से 09:00 am, रवि, 10 नव॰ 2030 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2031 में देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) की तिथि कब है?

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा: 03:53 am, शुक्र, 28 नव॰ 2031 से 04:49 am, शनि, 29 नव॰ 2031 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: देव-दीपावली (त्रिपुरोत्सव) की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती (कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा)।

प्रश्न: देव दीपावली के लिए वाराणसी विशेष रूप से प्रसिद्ध क्यों है?

परंपरा के अनुसार, देवगण कार्तिक पूर्णिमा को गंगा में स्नान करने के लिए वाराणसी आते हैं, जिससे यह नगरी एक दिव्य मिलन स्थल बन जाती है।

प्रश्न: क्या देव दीपावली और दिवाली एक ही हैं?

नहीं, देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं द्वारा मनाई जाती है, जबकि दिवाली कार्तिक के चंद्र मास में पहले आती है और भगवान राम की वापसी का उत्सव मनाती है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।