Diwali
त्यौहारअन्य नाम: Deepavali

Diwali
Diwali: मुख्य तथ्य
Diwali का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग आश्विन कृष्ण अमावस्या कहता है।
- तिथि नियम
- कार्तिक कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)कृष्ण अमावस्याकार्तिक मास
- तिथि स्वामी और श्रेणी
- Pitra · Purna Tithi
Diwali के बारे में
दिवाली, प्रकाश का पर्व, भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और अंधकार पर प्रकाश की विजय का स्मरण कराती है।
सायंकाल शुभ लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के दौरान धन, ज्ञान और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
व्रत विधि और उपवास नियम
दिवाली में घर को रोशन करना, देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करना और सायंकालीन भव्य पूजा संपन्न करना शामिल है।
- पूरे घर की भलीभाँति सफाई करें। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी केवल स्वच्छ घरों में ही प्रवेश करती हैं और निवास करती हैं।
- मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ और देवी लक्ष्मी के पदचिह्न भीतर की ओर मुख करके अंकित करें।
- सायंकाल देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के लिए वेदी सजाएँ, कमल पुष्प अर्पित करें, और घर के चारों ओर मिट्टी के दीये जलाएँ।
Diwali: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिक कृष्ण अमावस्या (अमांत पंचांग में आश्विन कृष्ण अमावस्या); स्वामी Pitra, Purna Tithi।
टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।
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