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गोस्वामी तुलसीदास जयंती

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2035 में तारीख
गुरुवार, 9 अगस्त 2035
तिथि
श्रावण शुक्ल सप्तमी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
01:41 pm, 09 अग॰ से 02:39 pm, 10 अग॰ तक
चंद्र मास
श्रावण · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Goswami Tulsidas Jayanti
2035 पर्व तिथि और मुहूर्त

गोस्वामी तुलसीदास जयंती

गुरुवार, 9 अगस्त 2035

चंद्र मास: श्रावण

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:01:41 pm, 09 अग॰
तिथि समाप्ति:02:39 pm, 10 अग॰

गोस्वामी तुलसीदास जयंती: मुख्य तथ्य

गोस्वामी तुलसीदास जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी (सातवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
श्रावण शुक्ल सप्तमी (पूर्णिमांत)शुक्ल सप्तमीश्रावण मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Surya · Bhadra Tithi

आने वाले वर्षों में श्रावण शुक्ल सप्तमी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203609:51 pm, सोम, 28 जुल॰08:44 pm, मंगल, 29 जुल॰
203709:06 pm, रवि, 16 अग॰07:12 pm, सोम, 17 अग॰
203805:21 pm, शुक्र, 6 अग॰02:59 pm, शनि, 7 अग॰
203901:38 pm, बुध, 27 जुल॰12:11 pm, गुरु, 28 जुल॰
204001:00 pm, मंगल, 14 अग॰12:33 pm, बुध, 15 अग॰

इस दिन का पंचांग

गोस्वामी तुलसीदास जयंती · 9 अग॰ 2035

वारगुरुवार
तिथिशुक्ल षष्ठी01:26 pm → 01:41 pm
नक्षत्रचित्रा05:12 pm → 06:15 pm
योगशुभ
करणतैतिल
चंद्र मासश्रावण
ब्रह्म मुहूर्त04:21 am → 05:04 am
अभिजित मुहूर्त11:59 am → 12:53 pm
निशिता मुहूर्त12:05 am → 12:48 am
राहु काल02:06 pm → 03:46 pm

गोस्वामी तुलसीदास जयंती के बारे में

गोस्वामी तुलसीदास जयंती महान संत-कवि तुलसीदास के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जिन्होंने हिंदी भाषी जगत को अमर रामचरितमानस दिया और सर्वाधिक प्रिय हनुमान चालीसा की रचना की। माना जाता है कि उनका जन्म सोलहवीं शताब्दी में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था।

तुलसीदास ने अपना जीवन भगवान राम को समर्पित किया और ऐसी कविता के माध्यम से भक्ति, विनम्रता और धार्मिक जीवन का संदेश फैलाया जो आम लोगों के लिए सुगम थी। उनकी रचनाओं ने उत्तर भारत के धार्मिक परिदृश्य को रूपांतरित कर दिया और राम की कथा को लाखों घरों में एक जीवंत उपस्थिति बना दिया।

इस दिन भक्त राम मंदिरों में एकत्रित होकर रामचरितमानस का पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा गाते हैं और संत की अटूट आस्था का स्मरण करते हैं। यह कठोर उपवास के बजाय प्रेरणा का दिन है, जिसमें प्रार्थना, दान और पवित्र साहित्य के अध्ययन पर बल दिया जाता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

तुलसीदास जयंती भक्ति गायन, उनकी रचनाओं के पाठ और संत-कवि की भावना में दान-पुण्य के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • जल्दी उठें, स्नान करें और यदि संभव हो तो राम या हनुमान मंदिर जाएं; स्वच्छ, सादे वस्त्र पहनें।
  • सुबह-शाम हनुमान चालीसा, रामचरितमानस या तुलसीदास के चुने हुए दोहों का पाठ करें।
  • सत्संग आयोजित करें या उसमें शामिल हों, जहां भक्त भजन गाते हैं और तुलसीदास की शिक्षाओं पर चर्चा करते हैं।
  • ब्राह्मणों, विद्यार्थियों और निर्धनों को भोजन कराएं; रामचरितमानस या अन्य पवित्र ग्रंथों की प्रतियां दान करें।
  • कई भक्त सायंकालीन प्रार्थना पूर्ण होने तक हल्का उपवास रखते हैं या सात्विक भोजन करते हैं।
  • तुलसीदास द्वारा प्रदर्शित भक्ति, धैर्य और सेवा के गुणों पर चिंतन करें।

व्रत कथा: तुलसीदास की हनुमान और राम से भेंट

तुलसीदास बचपन से ही भगवान राम के प्रति गहन भक्ति रखते थे। अपनी पत्नी के निधन के बाद उन्होंने सांसारिक मोह त्याग दिया और एक साधक के रूप में भ्रमण करने लगे।

एक दिन उनकी भेंट एक वृद्ध व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें वन में भगवान राम और लक्ष्मण के दर्शन तक पहुंचाया। बाद में ही तुलसीदास को यह एहसास हुआ कि वह वृद्ध पुरुष साक्षात हनुमान थे, जिन्होंने यह दिव्य भेंट सुनिश्चित की थी।

इस भेंट ने तुलसीदास की भक्ति को और गहन कर दिया, और उन्होंने दिव्य प्रेरणा से रामचरितमानस की रचना आरंभ की। यह ग्रंथ आम जनता के लिए राम के जीवन का प्रिय पुनर्कथन बन गया।

उनकी जयंती भक्ति की शक्ति और पवित्र काव्य के उस उपहार का सम्मान करती है जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है।

गोस्वामी तुलसीदास जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: गोस्वामी तुलसीदास जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

श्रावण शुक्ल सप्तमी; स्वामी Surya, Bhadra Tithi।

प्रश्न: 2035 में गोस्वामी तुलसीदास जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल सप्तमी: 01:41 pm, गुरु, 9 अग॰ 2035 से 02:39 pm, शुक्र, 10 अग॰ 2035 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2036 में गोस्वामी तुलसीदास जयंती की तिथि कब है?

श्रावण शुक्ल सप्तमी: 09:51 pm, सोम, 28 जुल॰ 2036 से 08:44 pm, मंगल, 29 जुल॰ 2036 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: तुलसीदास सबसे अधिक किसके लिए प्रसिद्ध हैं?

वे रामचरितमानस और हनुमान चालीसा के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, जो उत्तर भारत में हिंदू भक्ति परंपरा के केंद्रीय ग्रंथ हैं।

प्रश्न: क्या तुलसीदास जयंती पर उपवास अनिवार्य है?

नहीं, यह दिन मुख्यतः भक्तिपूर्ण पाठ, गायन और दान-पुण्य के माध्यम से मनाया जाता है, न कि कठोर उपवास द्वारा।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।