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Gudi Padwa

त्यौहार

अन्य नाम: Ugadi, Nutan Varsh Prarambha

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Gudi Padwa
2026 पर्व तिथि और मुहूर्त

Gudi Padwa

Gudi Padwa: मुख्य तथ्य

Gudi Padwa का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (पूर्णिमांत)शुक्ल प्रतिपदाचैत्र मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Agni · Nanda Tithi

Gudi Padwa के बारे में

गुड़ी पड़वा, जिसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी तथा नूतन वर्ष प्रारंभ के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में चैत्र माह के आरंभ और पारंपरिक हिंदू नववर्ष का प्रतीक है। यह चैत्र के शुक्ल पक्ष के पहले दिन पड़ता है, जो वसंत विषुव और नई फसलों के आगमन के साथ मेल खाता है।

यह त्योहार भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना और परंपरा के अनुसार अयोध्या के राजा के रूप में भगवान राम के राज्याभिषेक का स्मरण कराता है। घरों के बाहर एक गुड़ी—बांस की छड़ी पर बंधा चमकीला पीला या लाल कपड़ा जिसके शीर्ष पर उल्टा कांस्य या चांदी का पात्र होता है—विजय, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक स्वरूप फहराई जाती है।

परिवार दिन की शुरुआत तेल स्नान से करते हैं, नए वस्त्र पहनते हैं, प्रवेश द्वार पर रंगीन रंगोली बनाते हैं और नीम के पत्तों एवं गुड़ का विशेष मिश्रण बांटते हैं। यह कड़वा-मीठा स्वाद जीवन के सुखों और दुखों को समभाव से स्वीकार करने का प्रतीक है।

व्रत विधि और उपवास नियम

गुड़ी पड़वा गुड़ी फहराने, प्रतीकात्मक भोजन करने और प्रार्थनाओं एवं मेलजोल के साथ नववर्ष का स्वागत करने के साथ मनाया जाता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • जल्दी उठें, शरीर पर तेल लगाएं और गुनगुने पानी से स्नान करें; नए या नवधोए पारंपरिक वस्त्र पहनें।
  • प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्तों एवं गेंदे के फूलों का तोरण लगाएं।
  • गुड़ी फहराएं: बांस की छड़ी पर चमकीला कपड़ा, नीम एवं आम के पत्ते और शक्कर की डली बांधें; ऊपर उल्टा पात्र लगाएं और पूर्व दिशा की खिड़की या बालकनी में इसे ऊंचा उठाएं।
  • जीवन के विविध स्वादों के प्रतीक स्वरूप नीम के पत्तों को गुड़, इमली, नमक और कच्चे आम के साथ मिलाकर पारंपरिक प्रसाद तैयार करें एवं खाएं।
  • नववर्ष के लिए पंचांग श्रवण करें और आशीर्वाद के लिए मंदिर जाएं।
  • पड़ोसियों एवं परिवार के साथ मिठाइयां एवं उपहार बांटें; वर्ष की शुभ शुरुआत के लिए विवाद और नकारात्मक वाणी से बचें।

व्रत कथा: भगवान राम का राज्याभिषेक

राक्षसराज रावण को पराजित करने और चौदह वर्ष के वनवास को पूर्ण करने के बाद भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे।

नागरिकों ने उनका अत्यंत हर्ष से स्वागत किया और उन्हें अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान किया। उनका राज्याभिषेक 'राम राज्य' के आरंभ का प्रतीक बना, जो न्याय और समृद्धि का स्वर्णिम युग था।

कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा इसी राज्याभिषेक का स्मरण कराता है, और घरों के बाहर फहराई जाने वाली गुड़ी राम के धार्मिक शासन की विजय पताका का प्रतिनिधित्व करती है।

इस प्रकार यह त्योहार भगवान राम के आशीर्वाद और धर्म के नवीनीकरण का आह्वान करते हुए नववर्ष का स्वागत करता है।

Gudi Padwa: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: Gudi Padwa किस तिथि को मनाया जाता है?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा; स्वामी Agni, Nanda Tithi।

प्रश्न: गुड़ी किसका प्रतीक है?

गुड़ी विजय, समृद्धि और नववर्ष के दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है; उल्टा पात्र प्रचुरता का और कपड़ा सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्न: क्या गुड़ी पड़वा और उगादी एक ही हैं?

दोनों एक ही चंद्र नववर्ष का प्रतीक हैं, परंतु गुड़ी पड़वा महाराष्ट्रीयन नाम है, जबकि उगादी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाया जाता है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।