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गुरु रविदास जयंती

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2030 में तारीख
रविवार, 17 फ़रवरी 2030
तिथि
माघ शुक्ल पूर्णिमा (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
01:05 pm, 17 फ़र॰ से 11:50 am, 18 फ़र॰ तक
चंद्र मास
माघ · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Guru Ravidas Jayanti
2030 पर्व तिथि और मुहूर्त

गुरु रविदास जयंती

रविवार, 17 फ़रवरी 2030

चंद्र मास: माघ

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:01:05 pm, 17 फ़र॰
तिथि समाप्ति:11:50 am, 18 फ़र॰

गुरु रविदास जयंती: मुख्य तथ्य

गुरु रविदास जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
माघ शुक्ल पूर्णिमा (पूर्णिमांत)शुक्ल पूर्णिमामाघ मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Chandra · Purna Tithi

आने वाले वर्षों में माघ शुक्ल पूर्णिमा

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203104:49 pm, गुरु, 6 फ़र॰06:16 pm, शुक्र, 7 फ़र॰
203210:57 am, बुध, 25 फ़र॰01:13 pm, गुरु, 26 फ़र॰
203310:33 am, रवि, 13 फ़र॰12:34 pm, सोम, 14 फ़र॰
203403:59 pm, गुरु, 2 फ़र॰03:35 pm, शुक्र, 3 फ़र॰
203504:00 pm, बुध, 21 फ़र॰02:24 pm, गुरु, 22 फ़र॰

इस दिन का पंचांग

गुरु रविदास जयंती · 17 फ़र॰ 2030

वाररविवार
तिथिशुक्ल चतुर्दशी01:43 pm → 01:05 pm
नक्षत्रपुष्य02:33 am → 02:50 am
योगशोभन
करणवणिज
चंद्र मासमाघ
ब्रह्म मुहूर्त05:15 am → 06:06 am
अभिजित मुहूर्त12:12 pm → 12:57 pm
निशिता मुहूर्त12:09 am → 01:00 am
राहु काल04:48 pm → 06:12 pm

गुरु रविदास जयंती के बारे में

गुरु रविदास जयंती संत रविदास, जो पंद्रहवीं शताब्दी के एक रहस्यवादी कवि-संत, समाज सुधारक और उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन के आध्यात्मिक प्रकाशपुंज थे, के जन्मोत्सव का स्मरण कराती है। वाराणसी (काशी) में परंपरागत रूप से निम्न-जाति माने जाने वाले परिवार में जन्मे गुरु रविदास उन सर्वाधिक श्रद्धेय संतों में से एक बने, जिनकी भक्ति रचनाएं सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित हैं।

उनकी शिक्षाओं ने ईश्वर की एकता (निर्गुण ब्रह्म), जाति भेद की निरर्थकता, श्रम की गरिमा और सच्ची भक्ति की रूपांतरकारी शक्ति पर बल दिया। उन्होंने घोषित किया कि आध्यात्मिक मूल्य जन्म से नहीं बल्कि व्यक्ति के कर्मों और आंतरिक पवित्रता से निर्धारित होता है। समानता, करुणा और सामाजिक न्याय का उनका संदेश आज भी लाखों लोगों को, विशेषकर रविदासिया समुदाय और भक्ति परंपरा के अनुयायियों को, प्रेरित करता है।

गुरु रविदास ने कई मर्मस्पर्शी भजनों (बाणी) की रचना की, जो भारत और विश्वभर के गुरुद्वारों एवं रविदासिया मंदिरों (डेरों) में गाए जाते हैं। उनका जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, शोभायात्राओं, सामुदायिक प्रार्थनाओं और लंगर के वितरण के साथ मनाया जाता है, जो उनके एकता, विनम्रता और मानवता की सेवा के आदर्शों को पुनः स्थापित करता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

गुरु रविदास जयंती भक्ति गायन, उनकी बाणी के पाठ, सामुदायिक प्रार्थनाओं और लंगर के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सुबह जल्दी गुरुद्वारे या रविदासिया मंदिर जाएं और प्रार्थना करें।
  • गुरु रविदास की बाणी एवं भजनों के पाठ और गायन में भाग लें।
  • उनके जीवन, शिक्षाओं और सामाजिक समानता के संदेश पर प्रवचन (कथा) सुनें।
  • पवित्र ग्रंथ लेकर और गुरबाणी का जाप करते हुए नगर कीर्तन या सामुदायिक शोभायात्रा में शामिल हों।
  • सभी आगंतुकों के लिए लंगर तैयार करने और परोसने में सहायता करते हुए सेवा में संलग्न हों।
  • जाति समानता, ईमानदार श्रम, विनम्रता और ईश्वर के प्रति भक्ति की उनकी शिक्षाओं पर चिंतन करें।

गुरु रविदास जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: गुरु रविदास जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

माघ शुक्ल पूर्णिमा; स्वामी Chandra, Purna Tithi।

प्रश्न: 2030 में गुरु रविदास जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल पूर्णिमा: 01:05 pm, रवि, 17 फ़र॰ 2030 से 11:50 am, सोम, 18 फ़र॰ 2030 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2031 में गुरु रविदास जयंती की तिथि कब है?

माघ शुक्ल पूर्णिमा: 04:49 pm, गुरु, 6 फ़र॰ 2031 से 06:16 pm, शुक्र, 7 फ़र॰ 2031 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: गुरु रविदास किसके लिए प्रसिद्ध हैं?

वे अपनी भक्ति काव्य, जाति भेदभाव के प्रति उनके विरोध और गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी रचनाओं के समावेशन के लिए जाने जाते हैं।

प्रश्न: गुरु रविदास जयंती कैसे मनाई जाती है?

प्रार्थनाओं, कीर्तन, शोभायात्राओं, लंगर और समानता एवं भक्ति की उनकी शिक्षाओं पर चिंतन के माध्यम से।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।