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हरतालिका तीज

त्यौहार

अन्य नाम: Haritalika 3

त्वरित जानकारी

2045 में तारीख
बुधवार, 13 सितंबर 2045
तिथि
भाद्रपद शुक्ल तृतीया (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
12:27 am, 13 सित॰ से 09:50 pm, 13 सित॰ तक
चंद्र मास
भाद्रपद · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Hartalika Teej
2045 पर्व तिथि और मुहूर्त

हरतालिका तीज

बुधवार, 13 सितंबर 2045

चंद्र मास: भाद्रपद

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:12:27 am, 13 सित॰
तिथि समाप्ति:09:50 pm, 13 सित॰

हरतालिका तीज: मुख्य तथ्य

हरतालिका तीज का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
भाद्रपद शुक्ल तृतीया (पूर्णिमांत)शुक्ल तृतीयाभाद्रपद मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Gauri · Jaya Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
ऋषि तर्पण (सामवेदिक)वराह जयंती

आने वाले वर्षों में भाद्रपद शुक्ल तृतीया

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
204604:30 pm, रवि, 2 सित॰12:56 pm, सोम, 3 सित॰

इस दिन का पंचांग

हरतालिका तीज · 13 सित॰ 2045

वारबुधवार
तिथिशुक्ल तृतीया12:27 am → 09:50 pm
नक्षत्रहस्त08:16 am → 06:04 am
योगब्रह्म
करणगर
चंद्र मासभाद्रपद
ब्रह्म मुहूर्त04:32 am → 05:18 am
अभिजित मुहूर्त11:52 am → 12:41 pm
निशिता मुहूर्त11:53 pm → 12:40 am
राहु काल12:16 pm → 01:49 pm

हरतालिका तीज के बारे में

हरतालिका तीज एक महत्वपूर्ण हिंदू उपवास त्योहार है जो मुख्यतः उत्तर एवं मध्य भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विवाहित एवं अविवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरे दिन) को, हरियाली तीज से एक दिन पहले, पड़ता है। 'हरतालिका' शब्द 'हरित' (अपहरण) और 'आलिका' (सखी) शब्दों से बना है, जो उस कथा को संदर्भित करता है जिसमें देवी पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह में सहायता के लिए वन में ले गई थीं।

यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का उत्सव मनाता है और वैवाहिक सुख, भक्ति एवं पति की दीर्घायु के लिए पत्नी की प्रार्थनाओं की शक्ति का प्रतीक है। महिलाएं कठोर निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल के) रखती हैं, सुंदर पारंपरिक परिधान पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और सामूहिक गायन एवं झूला झूलने में भाग लेती हैं। वातावरण भक्ति गीतों, लोकसंगीत और बहनापे की भावना से परिपूर्ण होता है।

हरतालिका तीज अविवाहित महिलाओं के लिए भी गहरा आध्यात्मिक महत्व रखती है, जो भगवान शिव जैसे योग्य एवं प्रेमपूर्ण पति की कामना के लिए व्रत रखती हैं। ये अनुष्ठान प्रतिबद्धता, त्याग और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था के मूल्यों को दृढ़ करते हैं। महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह त्योहार गौरी (पार्वती) पूजा और सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन की आशा से भी जुड़ा है।

व्रत विधि और उपवास नियम

हरतालिका तीज कठोर उपवास, प्रातःकालीन स्नान, शिव-पार्वती पूजा और रात्रि जागरण के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले जागें, अनुष्ठानिक स्नान करें और स्वच्छ या नए पारंपरिक वस्त्र, अधिमानतः हरे या लाल रंग के, पहनें।
  • सूर्योदय से अगली सुबह तक निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल के) रखें, या स्वास्थ्य की आवश्यकता होने पर केवल फल एवं दूध लें।
  • मिट्टी या हल्दी से देवी पार्वती (गौरी) की एक छोटी मूर्ति बनाएं और जल, दूध एवं शहद से उनका अभिषेक करें।
  • भगवान शिव और देवी पार्वती दोनों की एक साथ पूजा करें, बेल पत्र, फूल, फल और मिठाइयां अर्पित करें।
  • तीज गीत गाएं, हरतालिका तीज कथा सुनें और अन्य महिलाओं के साथ भक्तिपूर्ण सत्संग में समय बिताएं।
  • यदि संभव हो तो रात्रि जागरण करें, और अगले दिन प्रातःकालीन प्रार्थनाओं के बाद व्रत खोलें।

व्रत कथा: पार्वती का अपहरण

देवी पार्वती भगवान शिव से विवाह करने के लिए दृढ़संकल्प थीं, परंतु उनके पिता राजा दक्ष उनका विवाह किसी राजकुमार से करना चाहते थे।

उनकी सखियों ने उन्हें अपहृत कर घने वन में ले गईं, जहां उन्होंने शिव को पति रूप में पाने के लिए गहन तपस्या की।

उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भगवान शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया, और उनका दिव्य विवाह हरतालिका तीज का केंद्रीय विषय बना।

हरतालिका तीज: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: हरतालिका तीज किस तिथि को मनाया जाता है?

भाद्रपद शुक्ल तृतीया; स्वामी Gauri, Jaya Tithi।

प्रश्न: 2045 में हरतालिका तीज की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल तृतीया: 12:27 am, बुध, 13 सित॰ 2045 से 09:50 pm, बुध, 13 सित॰ 2045 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2046 में हरतालिका तीज की तिथि कब है?

भाद्रपद शुक्ल तृतीया: 04:30 pm, रवि, 2 सित॰ 2046 से 12:56 pm, सोम, 3 सित॰ 2046 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: हरतालिका तीज की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

ऋषि तर्पण (सामवेदिक) और वराह जयंती (भाद्रपद शुक्ल तृतीया)।

प्रश्न: हरतालिका तीज कौन मनाता है?

विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और अपने पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं आदर्श पति के लिए प्रार्थना करती हैं।

प्रश्न: क्या हरतालिका तीज एक निर्जला व्रत है?

हां, कई महिलाएं बिना अन्न-जल के कठोर व्रत रखती हैं, हालांकि स्वास्थ्य संबंधी चिंता वाली महिलाएं इसमें परिवर्तन कर सकती हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।