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होली

त्यौहार

अन्य नाम: Rangwali Holi, Dhulandi

त्वरित जानकारी

2034 में तारीख
रविवार, 5 मार्च 2034
तिथि
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
07:40 am, 05 मार्च से 09:15 am, 06 मार्च तक
चंद्र मास
चैत्र · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Holi
2034 पर्व तिथि और मुहूर्त

होली

रविवार, 5 मार्च 2034

चंद्र मास: चैत्र

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:07:40 am, 05 मार्च
तिथि समाप्ति:09:15 am, 06 मार्च

होली: मुख्य तथ्य

होली का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा कहता है।

तिथि नियम
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (पूर्णिमांत)कृष्ण प्रतिपदाचैत्र मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Agni · Nanda Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
वसंतोत्सवधूलिवंदन

आने वाले वर्षों में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203504:12 am, शनि, 24 मार्च04:31 am, रवि, 25 मार्च
203602:39 pm, बुध, 12 मार्च12:16 pm, गुरु, 13 मार्च
203705:58 am, सोम, 2 मार्च02:10 am, मंगल, 3 मार्च
203807:39 am, रवि, 21 मार्च03:47 am, सोम, 22 मार्च
203910:05 pm, गुरु, 10 मार्च07:44 pm, शुक्र, 11 मार्च

इस दिन का पंचांग

होली · 5 मार्च 2034

वाररविवार
तिथिकृष्ण प्रतिपदा07:40 am → 09:15 am
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनी06:20 pm → 08:12 pm
योगधृति
करणबालव
चंद्र मासफाल्गुन
ब्रह्म मुहूर्त05:03 am → 05:52 am
अभिजित मुहूर्त12:09 pm → 12:56 pm
निशिता मुहूर्त12:07 am → 12:56 am
राहु काल04:55 pm → 06:23 pm

होली के बारे में

होली रंगों का जीवंत त्योहार है, जो वसंत के आगमन और बुराई पर भक्ति की विजय का प्रतीक है, जिसे प्रह्लाद और होलिका की कथा द्वारा दर्शाया गया है।

होली की पूर्व संध्या पर भद्रा-रहित प्रदोष मुहूर्त में होलिका दहन की अग्नि प्रज्वलित की जाती है, इसके अगले दिन आनंदमय रंगोत्सव मनाया जाता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह त्योहार दो दिवसीय आयोजन है जो एक पवित्र अग्नि से आरंभ होकर रंगों के उत्सव के साथ समाप्त होता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन पूजा करें। लकड़ी और गोबर के उपलों का उपयोग करके एक विशाल अग्निकुंड तैयार किया जाता है।
  • अग्नि की परिक्रमा करते हुए उसमें कच्चा सूत, हल्दी, कुमकुम और मिठाइयां अर्पित करें।
  • अगले दिन (धुलंडी) लोग एक-दूसरे पर सूखे रंग (गुलाल) और रंगीन जल उल्लासपूर्वक फेंकते हैं।

व्रत कथा: प्रह्लाद की भक्ति

राक्षसराज हिरण्यकशिपु की मांग थी कि सभी केवल उसी की पूजा करें, परंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त बना रहा।

हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को जलाने के लिए अपनी दुष्ट बहन होलिका, जिसके पास एक जादुई अग्निरोधक चादर थी, से सहायता मांगी।

जैसे ही अग्नि प्रचंड हुई, एक दिव्य वायु ने चादर को होलिका से उड़ाकर प्रह्लाद पर लपेट दिया। होलिका जलकर भस्म हो गई, जबकि प्रह्लाद सकुशल बाहर निकल आया।

होली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: होली किस तिथि को मनाया जाता है?

चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (अमांत पंचांग में फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा); स्वामी Agni, Nanda Tithi।

प्रश्न: 2034 में होली की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण प्रतिपदा: 07:40 am, रवि, 5 मार्च 2034 से 09:15 am, सोम, 6 मार्च 2034 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2035 में होली की तिथि कब है?

चैत्र कृष्ण प्रतिपदा: 04:12 am, शनि, 24 मार्च 2035 से 04:31 am, रवि, 25 मार्च 2035 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: होली की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

वसंतोत्सव और धूलिवंदन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा)।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।