मुख्य सामग्री पर जाएँ
Yoga Panchang
लॉग इन करें

कल्कि जयंती

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2037 में तारीख
शनिवार, 15 अगस्त 2037
तिथि
श्रावण शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
11:33 pm, 15 अग॰ से 09:06 pm, 16 अग॰ तक
चंद्र मास
श्रावण · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Kalki Jayanti
2037 पर्व तिथि और मुहूर्त

कल्कि जयंती

शनिवार, 15 अगस्त 2037

चंद्र मास: श्रावण

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:11:33 pm, 15 अग॰
तिथि समाप्ति:09:06 pm, 16 अग॰

कल्कि जयंती: मुख्य तथ्य

कल्कि जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी (छठी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
श्रावण शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)शुक्ल षष्ठीश्रावण मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Kartikeya · Nanda Tithi

आने वाले वर्षों में श्रावण शुक्ल षष्ठी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203807:48 pm, गुरु, 5 अग॰05:21 pm, शुक्र, 6 अग॰
203902:41 pm, मंगल, 26 जुल॰01:38 pm, बुध, 27 जुल॰
204012:52 pm, सोम, 13 अग॰01:00 pm, मंगल, 14 अग॰
204106:14 pm, शुक्र, 2 अग॰08:18 pm, शनि, 3 अग॰
204204:17 pm, मंगल, 22 जुल॰06:44 pm, बुध, 23 जुल॰

इस दिन का पंचांग

कल्कि जयंती · 15 अग॰ 2037

वारशनिवार
तिथिशुक्ल पंचमी02:28 am → 11:33 pm
नक्षत्रहस्त04:41 pm → 02:24 pm
योगसाध्य
करणबव
चंद्र मासश्रावण
ब्रह्म मुहूर्त04:23 am → 05:07 am
अभिजित मुहूर्त11:59 am → 12:51 pm
निशिता मुहूर्त12:04 am → 12:47 am
राहु काल09:07 am → 10:46 am

कल्कि जयंती के बारे में

कल्कि जयंती भगवान विष्णु के प्रत्याशित भविष्य अवतार कल्कि की स्मृति में मनाई जाती है, जो दसवें और अंतिम अवतार हैं, जिनके वर्तमान युग (कलियुग) के अंत में धर्म की पुनर्स्थापना और एक नए स्वर्णिम युग (सतयुग) का सूत्रपात करने हेतु प्रकट होने की भविष्यवाणी की गई है। हिंदू शास्त्रों, विशेषकर पुराणों के अनुसार, कल्कि का जन्म शंभल गांव में विष्णुयश नामक एक ब्राह्मण के घर होगा, और वे देवदत्त नामक श्वेत अश्व पर सवार होकर, अधर्म और अज्ञान का नाश करने के लिए एक चमकती तलवार धारण करेंगे।

कल्कि की अवधारणा हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में समय की चक्रीय समझ में गहराई से निहित है। प्रत्येक ब्रह्मांडीय चक्र में चार युग होते हैं: सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। वर्तमान कलियुग नैतिक पतन, भौतिकवाद और आध्यात्मिक अंधकार से चिह्नित है। कल्कि का आगमन बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के नवीनीकरण का प्रतीक है, जो भक्तों को यह आशा प्रदान करता है कि दिव्य न्याय अवश्य विजयी होगा।

कल्कि जयंती प्रार्थना, उपवास, शास्त्रों के अध्ययन, और भगवान विष्णु के ध्यान के साथ मनाई जाती है। भक्त भौतिक संसार की नश्वरता और धर्ममय जीवन जीने के महत्व पर चिंतन करते हैं। यह पर्व विश्व के दिव्य रूपांतरण की तैयारी में सत्य, करुणा, आत्म-अनुशासन और भक्ति जैसे गुणों को विकसित करने की आध्यात्मिक स्मृति के रूप में कार्य करता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

कल्कि जयंती भगवान विष्णु की पूजा, शास्त्रों के अध्ययन, उपवास, और भविष्य के अवतार पर ध्यान के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और एक स्वच्छ, शांत पूजा स्थान तैयार करें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या मूर्ति की पूजा करें, पुष्प, तुलसी पत्र, धूप और दीप अर्पित करें।
  • उपवास रखें, केवल फल और दूध ग्रहण करें, या एक बार सात्विक भोजन करें।
  • भागवत पुराण और विष्णु पुराण से कल्कि अवतार का वर्णन करने वाले अंश पढ़ें या सुनें।
  • विष्णु सहस्रनाम और यदि उपलब्ध हो तो कल्कि स्तोत्र का जाप करें।
  • धार्मिकता के गुणों पर ध्यान करें और धर्म के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लें।

कल्कि जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: कल्कि जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

श्रावण शुक्ल षष्ठी; स्वामी Kartikeya, Nanda Tithi।

प्रश्न: 2037 में कल्कि जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल षष्ठी: 11:33 pm, शनि, 15 अग॰ 2037 से 09:06 pm, रवि, 16 अग॰ 2037 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2038 में कल्कि जयंती की तिथि कब है?

श्रावण शुक्ल षष्ठी: 07:48 pm, गुरु, 5 अग॰ 2038 से 05:21 pm, शुक्र, 6 अग॰ 2038 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: कल्कि कौन हैं?

कल्कि भगवान विष्णु के भविष्यवाणी किए गए दसवें अवतार हैं, जो कलियुग के अंत में धर्म की पुनर्स्थापना के लिए प्रकट होंगे।

प्रश्न: कल्कि जयंती कैसे मनाई जाती है?

विष्णु पूजा, उपवास, शास्त्र पाठ, जाप, और धार्मिकता तथा आध्यात्मिक नवीनीकरण पर ध्यान के माध्यम से।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।