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महाशिवरात्रि

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2030 में तारीख
शनिवार, 2 मार्च 2030
तिथि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
12:23 pm, 02 मार्च से 12:02 pm, 03 मार्च तक
चंद्र मास
फाल्गुन · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Maha Shivaratri
2030 पर्व तिथि और मुहूर्त

महाशिवरात्रि

शनिवार, 2 मार्च 2030

चंद्र मास: फाल्गुन

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:12:23 pm, 02 मार्च
तिथि समाप्ति:12:02 pm, 03 मार्च

महाशिवरात्रि: मुख्य तथ्य

महाशिवरात्रि का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग माघ कृष्ण चतुर्दशी कहता है।

तिथि नियम
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमांत)कृष्ण चतुर्दशीफाल्गुन मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Shiva · Rikta Tithi

आने वाले वर्षों में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203102:45 am, गुरु, 20 फ़र॰11:55 pm, गुरु, 20 फ़र॰
203204:52 am, बुध, 10 मार्च01:20 am, गुरु, 11 मार्च
203309:08 pm, रवि, 27 फ़र॰05:37 pm, सोम, 28 फ़र॰
203408:19 am, शुक्र, 17 फ़र॰06:45 am, शनि, 18 फ़र॰
203505:32 am, गुरु, 8 मार्च05:23 am, शुक्र, 9 मार्च

इस दिन का पंचांग

महाशिवरात्रि · 2 मार्च 2030

वारशनिवार
तिथिकृष्ण त्रयोदशी01:06 pm → 12:23 pm
नक्षत्रश्रवण12:14 pm → 12:10 pm
योगपरिघ
करणवणिज
चंद्र मासमाघ
ब्रह्म मुहूर्त05:06 am → 05:55 am
अभिजित मुहूर्त12:10 pm → 12:56 pm
निशिता मुहूर्त12:08 am → 12:57 am
राहु काल09:39 am → 11:06 am

महाशिवरात्रि के बारे में

महाशिवरात्रि भगवान शिव, परिवर्तन के महान देवता, को समर्पित भक्ति की सबसे पवित्र रात्रि है। यह शिव और शक्ति के दिव्य ब्रह्मांडीय नृत्य (तांडव) के साथ-साथ भगवान शिव और देवी पार्वती के पावन विवाह का भी प्रतीक है।

वैदिक परंपरा में, शिवरात्रि सांसारिक अंधकार पर आध्यात्मिक प्रकाश की विजय का प्रतीक है। भक्त दिव्य चेतना को जागृत करने के लिए रात्रि जागरण (जागरण), कठोर उपवास रखते हैं, और शिव लिंग पर पवित्र बिल्व (बेल) पत्र तथा अभिषेक अर्पित करते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

महाशिवरात्रि का उपवास गहन भक्ति, मानसिक शुद्धता, और तीव्र आध्यात्मिक अनुशासन के साथ मनाया जाता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • शिवरात्रि से एक दिन पूर्व (त्रयोदशी), भक्त दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
  • शिवरात्रि की सुबह, भक्त प्रातः स्नान करते हैं और पूरे दिन-रात के उपवास का संकल्प लेते हैं।
  • शिव पूजा रात्रि में की जाती है, या तो निशीथ काल के दौरान या चार प्रहर (पहर) की खिड़कियों में चार बार।
  • उपवास अगले दिन (पारणा) प्रातः स्नान के बाद, सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि की समाप्ति के बीच तोड़ा जाता है।

महाशिवरात्रि: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: महाशिवरात्रि किस तिथि को मनाया जाता है?

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमांत पंचांग में माघ कृष्ण चतुर्दशी); स्वामी Shiva, Rikta Tithi।

प्रश्न: 2030 में महाशिवरात्रि की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण चतुर्दशी: 12:23 pm, शनि, 2 मार्च 2030 से 12:02 pm, रवि, 3 मार्च 2030 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2031 में महाशिवरात्रि की तिथि कब है?

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी: 02:45 am, गुरु, 20 फ़र॰ 2031 से 11:55 pm, गुरु, 20 फ़र॰ 2031 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: निशीथ काल में शिव पूजा क्यों की जाती है?

निशीथ काल वह मध्यरात्रि का समय है जब भगवान शिव लिंगोद्भव के अनंत ब्रह्मांडीय स्वरूप में पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। इस समय पूजा करने से सर्वोच्च आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।