महालक्ष्मी व्रत देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र संकल्प है, जो धन, सद्गुण, साहस और गृहस्थ कल्याण की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी का महान स्वरूप हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति और परिवार की दीर्घायु तथा समृद्धि के लिए किया जाता है।
कई परंपराओं में यह व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी से आरंभ होकर सोलह दिनों तक चलता है और आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को समाप्त होता है। इस अवधि के दौरान देवी की प्रतिदिन सोलह उपचारों (षोडशोपचार पूजा) से आराधना की जाती है।
यह व्रत महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के अन्य भागों में लोकप्रिय है। इसमें पवित्रता, भक्ति, विवाहित महिलाओं के प्रति आतिथ्य और इस विश्वास पर विशेष बल दिया जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से घर से दरिद्रता, रोग और कलह दूर हो जाते हैं।