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रामानुजाचार्य जयंती

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2031 में तारीख
रविवार, 27 अप्रैल 2031
तिथि
वैशाख शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
06:52 am, 27 अप्रैल से 09:24 am, 28 अप्रैल तक
चंद्र मास
वैशाख · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Ramanujacharya Jayanti
2031 पर्व तिथि और मुहूर्त

रामानुजाचार्य जयंती

रविवार, 27 अप्रैल 2031

चंद्र मास: वैशाख

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:06:52 am, 27 अप्रैल
तिथि समाप्ति:09:24 am, 28 अप्रैल

रामानुजाचार्य जयंती: मुख्य तथ्य

रामानुजाचार्य जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी (छठी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
वैशाख शुक्ल षष्ठी (पूर्णिमांत)शुक्ल षष्ठीवैशाख मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Kartikeya · Nanda Tithi

आने वाले वर्षों में वैशाख शुक्ल षष्ठी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203209:39 pm, शुक्र, 14 मई11:43 pm, शनि, 15 मई
203310:29 pm, मंगल, 3 मई10:37 pm, बुध, 4 मई
203408:19 am, रवि, 23 अप्रैल06:28 am, सोम, 24 अप्रैल
203508:43 am, शनि, 12 मई06:22 am, रवि, 13 मई
203604:54 am, गुरु, 1 मई02:38 am, शुक्र, 2 मई

इस दिन का पंचांग

रामानुजाचार्य जयंती · 27 अप्रैल 2031

वाररविवार
तिथिशुक्ल षष्ठी06:52 am → 09:24 am
नक्षत्रआर्द्रा07:24 pm → 10:27 pm
योगसुकर्मा
करणकौलव
चंद्र मासवैशाख
ब्रह्म मुहूर्त04:17 am → 05:00 am
अभिजित मुहूर्त11:52 am → 12:45 pm
निशिता मुहूर्त11:56 pm → 12:40 am
राहु काल05:15 pm → 06:53 pm

रामानुजाचार्य जयंती के बारे में

रामानुजाचार्य जयंती श्री रामानुज के जन्म का स्मरण कराती है, जो 11वीं-12वीं शताब्दी के महान भारतीय दार्शनिक, धर्मशास्त्री और समाज सुधारक थे, जिन्होंने विशिष्टाद्वैत वेदांत और श्री वैष्णव संप्रदाय के सबसे प्रमुख प्रवर्तक के रूप में कार्य किया। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में जन्मे उन्होंने मंदिर पूजा, भक्ति साधना और विशिष्ट अद्वैत के दर्शन को पुनर्जीवित किया।

रामानुज ने सिखाया कि व्यष्टि आत्मा (जीव) ब्रह्म से भिन्न होते हुए भी उससे अविभाज्य है, और परमेश्वर (नारायण) एक व्यक्तिगत, सर्वव्यापी सत्य हैं जो शुभ गुणों से परिपूर्ण हैं। उन्होंने बल दिया कि भक्ति (प्रेममयी भक्ति) और प्रपत्ति (पूर्ण समर्पण) मुक्ति के सर्वाधिक निश्चित साधन हैं।

उन्होंने ब्रह्मसूत्रों पर श्री भाष्य, गीता भाष्य और वेदार्थ संग्रह जैसी गहन टीकाएँ रचीं। उन्होंने सभी वर्गों के लोगों के लिए मंदिरों और आध्यात्मिक ज्ञान के द्वार भी खोले, जिससे उन्हें उदयवर और एम्पेरुमानार जैसी उपाधियाँ प्राप्त हुईं।

श्री वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी रामानुज जयंती को विशेष पूजा, उनकी रचनाओं के पाठ, शोभायात्राओं और अन्नदानम (निःशुल्क भोजन वितरण) के माध्यम से मनाते हैं। उनकी शिक्षाएँ आज भी दक्षिण भारत और उसके पार लाखों भक्तों को प्रभावित करती हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह दिन उपवास, धर्मग्रंथों के अध्ययन और विष्णु पूजा के माध्यम से आचार्य के ज्ञान का पवित्र स्मरण किया जाता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • प्रातः जल्दी उठें, स्नान करें, और स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करें। आचार्य की विनम्रता और भक्ति की शिक्षाओं का पालन करने का संकल्प लें।
  • विष्णु अथवा श्री वैष्णव मंदिर जाएँ; यदि घर पर हों, तो भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के साथ रामानुज का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
  • भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम अथवा रामानुज के गीता भाष्य के अंशों का पाठ करें।
  • हल्का व्रत रखें अथवा दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन लें, प्याज़, लहसुन और तामसिक वस्तुओं से परहेज़ करें।
  • रामानुज के जीवन और शिक्षाओं को सुनें अथवा सुनाएँ, उनकी करुणा और सामाजिक समावेशिता पर बल देते हुए।
  • अन्नदानम में भाग लें अथवा सभी भक्तों की सेवा के आचार्य के आदर्श का अनुसरण करते हुए धर्मार्थ भोजन वितरण में योगदान करें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
रामानुज और भगवान विष्णु (रंगनाथ अथवा वेंकटेश्वर) का चित्रतुलसी पत्र और फूलपंचामृतचंदन का लेप, कुमकुम, हल्दीअगरबत्ती और घी का दीपकसात्विक प्रसाद (पायसम, पोंगल अथवा चावल)पान के पत्ते और सुपारी
पूजा प्रक्रिया:
  1. कलश के साथ स्वच्छ वेदी पर रामानुज और विष्णु की मूर्तियाँ व्यवस्थित करें।
  2. रामानुज के चित्र पर अभिषेक अथवा पाद्य (चरण प्रक्षालन) के लिए पंचामृत और जल अर्पित करें।
  3. तिलक लगाएँ और फूलों तथा तुलसी से सजाएँ।
  4. विष्णु सहस्रनाम अथवा गीता के श्लोकों का पाठ करें।
  5. भोग अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक आरती करें।
  6. प्रसाद वितरित करें और अतिथियों तथा विद्वानों का सम्मान करें।

व्रत कथा: रामानुज द्वारा पवित्र मंत्र का प्रसार

रामानुज को अपने गुरु से एक शक्तिशाली पवित्र मंत्र प्राप्त हुआ था, जिसके साथ यह कड़ा निर्देश भी था कि इसे किसी को न बताएँ। किंतु उनका हृदय सभी प्राणियों के प्रति करुणा से भर उठा, और उनका विश्वास था कि दिव्य ज्ञान सबके लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होना चाहिए। एक मंदिर के ऊँचे शिखर पर चढ़कर, उन्होंने उस मंत्र को ऊँची आवाज़ में पुकारा, ताकि जो भी सुनना चाहे, उसका आशीर्वाद प्राप्त कर सके। जब उनके गुरु को इसका पता चला, तो वे आरंभ में क्रोधित हुए, क्योंकि वह मंत्र गोपनीयता के साथ दिया गया था। किंतु शीघ्र ही उन्होंने रामानुज की असीम करुणा को पहचान लिया और घोषणा की, "केवल वही व्यक्ति सर्वोच्च शिक्षा धारण करने योग्य है, जो समस्त प्राणियों को ईश्वर की संतान के रूप में देखता है।" उस दिन से रामानुज ने सभी के लिए भक्ति के द्वार खोल दिए।

रामानुजाचार्य जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: रामानुजाचार्य जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

वैशाख शुक्ल षष्ठी; स्वामी Kartikeya, Nanda Tithi।

प्रश्न: 2031 में रामानुजाचार्य जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल षष्ठी: 06:52 am, रवि, 27 अप्रैल 2031 से 09:24 am, सोम, 28 अप्रैल 2031 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2032 में रामानुजाचार्य जयंती की तिथि कब है?

वैशाख शुक्ल षष्ठी: 09:39 pm, शुक्र, 14 मई 2032 से 11:43 pm, शनि, 15 मई 2032 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: विशिष्टाद्वैत वेदांत क्या है?

यह विशिष्ट अद्वैतवाद का दर्शन है: आत्मा ब्रह्म से भिन्न होते हुए भी सदैव उस पर आश्रित है, और परमेश्वर अनंत शुभ गुणों से युक्त हैं।

प्रश्न: रामानुज को समाज सुधारक क्यों कहा जाता है?

उन्होंने मंदिर पूजा, वैदिक ज्ञान और भक्ति साधना को सभी जातियों और वर्गों के लोगों के लिए सुलभ बनाया।

प्रश्न: कौन-से मंदिर विशेष रूप से रामानुज का सम्मान करते हैं?

श्रीरंगम, मेलुकोटे और कांचीपुरम का वरदराज पेरुमल मंदिर उनके जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।