मुख्य सामग्री पर जाएँ
Yoga Panchang
लॉग इन करें

सीता नवमी

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2035 में तारीख
मंगलवार, 15 मई 2035
तिथि
वैशाख शुक्ल नवमी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
03:30 am, 15 मई से 03:00 am, 16 मई तक
चंद्र मास
वैशाख · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Sita Navami
2035 पर्व तिथि और मुहूर्त

सीता नवमी

मंगलवार, 15 मई 2035

चंद्र मास: वैशाख

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:03:30 am, 15 मई
तिथि समाप्ति:03:00 am, 16 मई

सीता नवमी: मुख्य तथ्य

सीता नवमी का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी (नौवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
वैशाख शुक्ल नवमी (पूर्णिमांत)शुक्ल नवमीवैशाख मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Durga · Rikta Tithi

आने वाले वर्षों में वैशाख शुक्ल नवमी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203610:24 pm, शनि, 3 मई08:29 pm, रवि, 4 मई
203707:48 pm, गुरु, 23 अप्रैल05:43 pm, शुक्र, 24 अप्रैल
203809:09 pm, बुध, 12 मई07:22 pm, गुरु, 13 मई
203907:55 am, सोम, 2 मई07:54 am, मंगल, 3 मई
204001:15 am, रवि, 20 मई02:14 am, सोम, 21 मई

इस दिन का पंचांग

सीता नवमी · 15 मई 2035

वारमंगलवार
तिथिशुक्ल नवमी03:30 am → 03:00 am
नक्षत्रमघा05:30 pm → 05:28 pm
योगव्याघात
करणबालव
चंद्र मासवैशाख
ब्रह्म मुहूर्त04:07 am → 04:48 am
अभिजित मुहूर्त11:50 am → 12:44 pm
निशिता मुहूर्त11:56 pm → 12:38 am
राहु काल03:41 pm → 05:22 pm

सीता नवमी के बारे में

सीता नवमी, जिसे जानकी नवमी भी कहा जाता है, भगवान श्रीराम की दिव्य अर्धांगिनी तथा स्त्री गुण, पवित्रता और अटूट भक्ति की आदर्श स्वरूपा देवी सीता के जन्म का उत्सव है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी (नौवें दिन) को पड़ती है, जो प्रायः अप्रैल या मई में आती है।

माना जाता है कि राजा जनक को मिथिला में खेत जोतते समय सीता प्राप्त हुई थीं। उन्होंने उन्हें अपनी पुत्री के रूप में पाला, और वे आगे चलकर जानकी, वैदेही तथा मैथिली के नाम से जानी गईं। उनका जीवन अपने पति के प्रति अटूट भक्ति, समस्त प्राणियों के प्रति करुणा, तथा विपत्ति में साहस का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

इस दिन श्रद्धालु सीता के साथ राम और लक्ष्मण की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, रामायण का पाठ करते हैं, तथा सुखी एवं सदाचारी पारिवारिक जीवन हेतु प्रार्थना करते हैं। यह विशेष रूप से उन विवाहित स्त्रियों के लिए शुभ माना जाता है जो दांपत्य सुख तथा समृद्धि की कामना करती हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह व्रत दांपत्य सुख, पारिवारिक कल्याण, तथा सीता-राम के आशीर्वाद हेतु रखा जाता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • प्रातः शीघ्र उठें, स्नान करें, तथा परिवार और जीवनसाथी के कल्याण हेतु व्रत रखने का संकल्प लें।
  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखें, यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो केवल फल और दूध का सेवन करें।
  • राम-सीता मंदिर में जाएं या सीता, राम तथा लक्ष्मण की प्रतिमाओं के साथ घर में वेदी स्थापित करें।
  • रामायण, विशेषकर बाल कांड और अयोध्या कांड, का पाठ करें तथा सीता-राम की महिमा गाने वाले भजन गाएं।
  • देवताओं को पीले या लाल फूल, खीर, फल, तथा तुलसी दल अर्पित करें।
  • सायंकालीन आरती के बाद व्रत खोलें और परिवार तथा अतिथियों को प्रसाद वितरित करें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
सीता, राम तथा लक्ष्मण की प्रतिमाएं या मूर्तियांपीले तथा लाल फूलतुलसी दलचंदन का लेप तथा कुमकुमअगरबत्ती तथा घी का दीपकखीर या मीठा चावलफल तथा नारियल
पूजा प्रक्रिया:
  1. वेदी को स्वच्छ करें और प्रतिमाओं को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें।
  2. देवताओं को जल, दूध, या पंचामृत से अभिषेक करें।
  3. चंदन का लेप तथा कुमकुम लगाएं; फूलों और तुलसी से श्रृंगार करें।
  4. अगरबत्ती तथा दीपक जलाएं; खीर और फलों का भोग अर्पित करें।
  5. राम स्तुति या सीता-राम भजनों का पाठ करें।
  6. आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

व्रत कथा: सीता की प्राप्ति

मिथिला के राजा जनक एक महान यज्ञ की तैयारी हेतु खेत जोत रहे थे, तभी उनके हल की नोक एक बड़े स्वर्ण कलश से टकराई। उसके भीतर एक सुंदर शिशु कन्या लेटी थी, जो साक्षात देवी लक्ष्मी के समान तेजस्वी थी।

अत्यंत हर्षित होकर, जनक तथा उनकी रानी सुनयना ने उस कन्या को गोद लिया और उसका नाम सीता रखा, क्योंकि वह हल की रेखा (सीता) में मिली थी। वह बड़ी होकर अद्वितीय सद्गुण तथा सौंदर्य की स्वामिनी बनी, जिसकी नियति भगवान श्रीराम की अर्धांगिनी तथा भक्ति और पवित्रता के शाश्वत प्रतीक के रूप में थी।

सीता नवमी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: सीता नवमी किस तिथि को मनाया जाता है?

वैशाख शुक्ल नवमी; स्वामी Durga, Rikta Tithi।

प्रश्न: 2035 में सीता नवमी की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल नवमी: 03:30 am, मंगल, 15 मई 2035 से 03:00 am, बुध, 16 मई 2035 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2036 में सीता नवमी की तिथि कब है?

वैशाख शुक्ल नवमी: 10:24 pm, शनि, 3 मई 2036 से 08:29 pm, रवि, 4 मई 2036 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: सीता नवमी कब मनाई जाती है?

यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पड़ती है।

प्रश्न: विवाहित स्त्रियां यह व्रत क्यों रखती हैं?

वे दांपत्य सामंजस्य, अपने पति की दीर्घायु, तथा सदाचारी पारिवारिक जीवन हेतु सीता माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखती हैं।

प्रश्न: इस दिन सीता माता को क्या अर्पित करना चाहिए?

खीर, पीले फूल, तुलसी दल, तथा फल पारंपरिक रूप से अर्पित किए जाते हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।