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उपांग ललिता व्रत

त्यौहार

त्वरित जानकारी

2043 में तारीख
बुधवार, 7 अक्टूबर 2043
तिथि
आश्विन शुक्ल पंचमी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
04:33 pm, 07 अक्टू॰ से 07:04 pm, 08 अक्टू॰ तक
चंद्र मास
आश्विन · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Upanga Lalita Vrata
2043 पर्व तिथि और मुहूर्त

उपांग ललिता व्रत

बुधवार, 7 अक्टूबर 2043

चंद्र मास: आश्विन

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:04:33 pm, 07 अक्टू॰
तिथि समाप्ति:07:04 pm, 08 अक्टू॰

उपांग ललिता व्रत: मुख्य तथ्य

उपांग ललिता व्रत का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी (पाँचवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
आश्विन शुक्ल पंचमी (पूर्णिमांत)शुक्ल पंचमीआश्विन मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Naga · Purna Tithi

आने वाले वर्षों में आश्विन शुक्ल पंचमी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
204402:46 pm, रवि, 25 सित॰03:54 pm, सोम, 26 सित॰
204508:58 am, शनि, 14 अक्टू॰08:58 am, रवि, 15 अक्टू॰
204606:06 pm, बुध, 3 अक्टू॰03:58 pm, गुरु, 4 अक्टू॰

इस दिन का पंचांग

उपांग ललिता व्रत · 7 अक्टू॰ 2043

वारबुधवार
तिथिशुक्ल चतुर्थी02:08 pm → 04:33 pm
नक्षत्रविशाखा05:02 am → 07:53 am
योगप्रीति
करणविष्टि (भद्रा)
चंद्र मासआश्विन
ब्रह्म मुहूर्त04:39 am → 05:28 am
अभिजित मुहूर्त11:45 am → 12:32 pm
निशिता मुहूर्त11:44 pm → 12:33 am
राहु काल12:08 pm → 01:36 pm

उपांग ललिता व्रत के बारे में

उपांग ललिता व्रत एक गहन आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो आदि शक्ति ललिता की आराधना को उपांगों — पवित्र ज्ञान के सहायक अंगों — के प्रति समर्पण के साथ जोड़ता है। यह उन साधकों द्वारा किया जाता है जो बुद्धि की परिष्करण, आध्यात्मिक अनुशासन और देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी की कृपा चाहते हैं।

यह व्रत इस बात पर बल देता है कि बाह्य अनुष्ठान को आंतरिक अध्ययन का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। उपांगों में परंपरागत रूप से ध्वनिशास्त्र, व्याकरण, ज्योतिष और अनुष्ठान-प्रक्रिया जैसी सहायक विद्याएं शामिल हैं, जबकि ललिता परम देवी की क्रीड़ामयी, सर्वव्यापी चेतना का प्रतिनिधित्व करती हैं।

यद्यपि यह प्रमुख पर्वों की तुलना में कम प्रचलित है, फिर भी उपांग ललिता व्रत उन साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है जो शास्त्रीय अध्ययन को भक्ति साधना के साथ जोड़ना चाहते हैं। यह सामान्यतः किसी गुरु या पंचांग के परामर्श से चुने गए शुभ दिन पर किया जाता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह व्रत देवी ललिता की दैनिक पूजा, शास्त्रों के अध्ययन और अनुशासित सात्विक जीवनशैली के माध्यम से निभाया जाता है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • किसी गुरु या विश्वसनीय पंचांग से परामर्श लेकर व्रत आरंभ करने के लिए शुभ दिन चुनें।
  • स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें, और स्वच्छ वेदी पर देवी ललिता की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें।
  • व्रत के प्रत्येक दिन ललिता सहस्रनाम, ललिता त्रिशती या देवी महात्म्य का पाठ करें।
  • किसी उपांग या संबंधित शास्त्र, जैसे व्याकरण, ज्योतिष अथवा वैदिक अनुष्ठान ग्रंथों के अध्ययन में समय समर्पित करें।
  • व्रत काल में शाकाहारी भोजन करें, सत्यनिष्ठा का पालन करें, और प्रतिदिन दान करें।

उपांग ललिता व्रत: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: उपांग ललिता व्रत किस तिथि को मनाया जाता है?

आश्विन शुक्ल पंचमी; स्वामी Naga, Purna Tithi।

प्रश्न: 2043 में उपांग ललिता व्रत की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल पंचमी: 04:33 pm, बुध, 7 अक्टू॰ 2043 से 07:04 pm, गुरु, 8 अक्टू॰ 2043 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2044 में उपांग ललिता व्रत की तिथि कब है?

आश्विन शुक्ल पंचमी: 02:46 pm, रवि, 25 सित॰ 2044 से 03:54 pm, सोम, 26 सित॰ 2044 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: उपांग ललिता व्रत किसे करना चाहिए?

विद्यार्थियों, विद्वानों और आदि शक्ति के उन भक्तों को जो ज्ञान और भक्ति दोनों को गहरा करना चाहते हैं।

प्रश्न: क्या इस व्रत की कोई निश्चित तिथि है?

यह तिथि परंपरागत रूप से किसी आध्यात्मिक गुरु द्वारा व्यक्ति की जन्मपत्री या पंचांग के अनुसार चुनी जाती है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।