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वरद चतुर्थी

त्यौहार

अन्य नाम: Sankat Chaturthi, Samkata 4, Varada Chaturthi, Varada(Til) 4, Vasudeva Chaturthi

त्वरित जानकारी

2032 में तारीख
शनिवार, 14 फ़रवरी 2032
तिथि
माघ शुक्ल चतुर्थी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
01:30 am, 14 फ़र॰ से 11:05 pm, 14 फ़र॰ तक
चंद्र मास
माघ · शुक्ल पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Varada Chaturthi
2032 पर्व तिथि और मुहूर्त

वरद चतुर्थी

शनिवार, 14 फ़रवरी 2032

चंद्र मास: माघ

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:01:30 am, 14 फ़र॰
तिथि समाप्ति:11:05 pm, 14 फ़र॰

वरद चतुर्थी: मुख्य तथ्य

वरद चतुर्थी का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (चौथी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
माघ शुक्ल चतुर्थी (पूर्णिमांत)शुक्ल चतुर्थीमाघ मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Ganesha · Rikta Tithi

आने वाले वर्षों में माघ शुक्ल चतुर्थी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203305:16 pm, बुध, 2 फ़र॰02:11 pm, गुरु, 3 फ़र॰
203411:00 am, सोम, 23 जन॰09:04 am, मंगल, 24 जन॰
203501:23 pm, रवि, 11 फ़र॰12:27 pm, सोम, 12 फ़र॰
203610:25 pm, गुरु, 31 जन॰11:54 pm, शुक्र, 1 फ़र॰
203710:35 pm, सोम, 19 जन॰01:19 am, बुध, 21 जन॰

इस दिन का पंचांग

वरद चतुर्थी · 14 फ़र॰ 2032

वारशनिवार
तिथिशुक्ल चतुर्थी01:30 am → 11:05 pm
नक्षत्रउत्तर भाद्रपद08:31 pm → 06:40 pm
योगसाध्य
करणवणिज
चंद्र मासमाघ
ब्रह्म मुहूर्त05:17 am → 06:09 am
अभिजित मुहूर्त12:13 pm → 12:57 pm
निशिता मुहूर्त12:09 am → 01:00 am
राहु काल09:48 am → 11:11 am

वरद चतुर्थी के बारे में

सकट चौथ, जिसे संकट चतुर्थी, वरद चतुर्थी अथवा वासुदेव चतुर्थी भी कहा जाता है, विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित एक मासिक तथा वार्षिक व्रत दिवस है। यह माघ मास (जनवरी-फरवरी) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथे दिन) को आती है, और विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु हेतु मनाई जाती है।

'सकट' शब्द कठिनाइयों अथवा बाधाओं को दर्शाता है, और 'संकट' का अर्थ है परेशानियाँ। यह व्रत रखने से भक्तों की मान्यता है कि भगवान गणेश पारिवारिक जीवन से कष्टों को दूर करते हैं, संतान को आशीर्वाद देते हैं, और नए कार्यों में सफलता प्रदान करते हैं।

इस दिन, स्त्रियाँ संध्याकाल में चंद्रमा की पूजा करने के लिए एकत्र होती हैं और सकट चौथ कथा सुनती हैं। इस पर्व की जड़ें उत्तर भारतीय परंपराओं में गहराई से जमी हुई हैं और यह विघ्नहर्ता के रूप में गणेश की आराधना से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है।

व्रत विधि और उपवास नियम

माताएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं और चंद्रमा के दर्शन तथा अर्घ्य अर्पण के पश्चात व्रत का पारण करती हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • प्रातः जल्दी उठें, स्नान करें, और अपने बच्चों तथा परिवार की भलाई के लिए सकट चौथ व्रत रखने का संकल्प लें।
  • पूरे दिन अन्न-जल का त्याग करें; यदि पूर्ण व्रत संभव न हो, तो केवल फल अथवा दूध ग्रहण करें।
  • संध्याकाल में भगवान गणेश की एक छोटी वेदी तैयार करें, जिसमें उनका चित्र अथवा मूर्ति, दूर्वा घास, मोदक और लड्डू हों।
  • उगते हुए चंद्रमा की पूजा करें, चंद्र देव को अर्घ्य (अक्षत और फूल मिश्रित जल) अर्पित करें।
  • सकट चौथ कथा और गणेश स्तोत्रों का पाठ करें, और चंद्रमा के दर्शन तथा प्रसाद वितरण के पश्चात व्रत का पारण करें।
  • नकारात्मकता, क्रोध और निंदा से बचें; शांत और प्रार्थनामय वातावरण बनाए रखें।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
गणेश की मूर्ति अथवा चित्रदूर्वा घासमोदक अथवा लड्डू मिठाइयाँलाल फूलअगरबत्ती और दीपकचंदन का लेप और कुमकुमनारियल, फलअक्षत और जल
पूजा प्रक्रिया:
  1. गणेश को वेदी पर स्थापित करें और उनका आवाहन करें।
  2. दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक अर्पित करें।
  3. तिलक लगाएँ और आरती करें।
  4. 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जाप करें।
  5. संध्याकाल में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें।
  6. प्रसाद के साथ व्रत का पारण करें।

व्रत कथा: भक्त और सिंह

एक निर्धन वृद्धा के पास केवल एक पुत्र था और वह अपनी गाय की कृपा से जीवन-यापन करती थी। एक दिन, उसका पुत्र गाय के लिए घास काटने निकला और एक ऐसे खेत में प्रवेश कर गया जहाँ एक भयंकर सिंह रहता था। जब लड़का संध्या तक वापस नहीं लौटा, तो माँ ने भगवान गणेश से हृदयपूर्वक प्रार्थना की।

उसकी भक्ति से द्रवित होकर, गणेश प्रकट हुए, सिंह को वश में किया, और लड़के को सुरक्षित उसकी माँ के पास लौटाया। वृद्धा ने मोदक बनाकर भगवान को अर्पित किए और उत्सव मनाया। उसी दिन से, माताएँ अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए गणेश की कृपा पाने हेतु सकट चौथ का व्रत रखती हैं।

वरद चतुर्थी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: वरद चतुर्थी किस तिथि को मनाया जाता है?

माघ शुक्ल चतुर्थी; स्वामी Ganesha, Rikta Tithi।

प्रश्न: 2032 में वरद चतुर्थी की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल चतुर्थी: 01:30 am, शनि, 14 फ़र॰ 2032 से 11:05 pm, शनि, 14 फ़र॰ 2032 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2033 में वरद चतुर्थी की तिथि कब है?

माघ शुक्ल चतुर्थी: 05:16 pm, बुध, 2 फ़र॰ 2033 से 02:11 pm, गुरु, 3 फ़र॰ 2033 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: क्या सकट चौथ केवल स्त्रियों के लिए है?

यह मुख्यतः माताओं द्वारा मनाया जाता है, किंतु बाधा-निवारण और पारिवारिक कल्याण के लिए कोई भी यह व्रत रख सकता है।

प्रश्न: सकट चौथ व्रत का पारण कब किया जाता है?

गणेश पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के पश्चात, चंद्रोदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

प्रश्न: सकट चौथ पर गणेश को क्या भोग अर्पित किया जाता है?

मोदक, लड्डू, दूर्वा घास और लाल फूल पारंपरिक अर्पण हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।