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Varaha Jayanti

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Varaha Jayanti
2029 पर्व तिथि और मुहूर्त

Varaha Jayanti

Varaha Jayanti: मुख्य तथ्य

Varaha Jayanti का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरी तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
भाद्रपद शुक्ल तृतीया (पूर्णिमांत)शुक्ल तृतीयाभाद्रपद मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Gauri · Jaya Tithi

Varaha Jayanti के बारे में

वराह जयंती भगवान वराह के प्राकट्य का स्मरण कराती है — भगवान विष्णु का तीसरा अवतार, दिव्य शूकर के रूप में। वे धरती माता (भू देवी) को दैत्य हिरण्याक्ष से बचाने के लिए अवतरित हुए, जिसने उन्हें ब्रह्मांडीय सागर में डुबो दिया था।

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाने वाली यह जयंती उस भगवान का सम्मान करती है, जिन्होंने पृथ्वी को अपने दांत पर उठाकर ब्रह्मांड में उसका उचित स्थान पुनर्स्थापित किया। यह पर्यावरणीय और ब्रह्मांडीय संरक्षण का पर्व है।

वराह सृष्टि को अराजकता से उबारने की धर्म की शक्ति का प्रतीक हैं। भारत भर के मंदिरों में, विशेषकर वराह क्षेत्रों में स्थित मंदिरों में, विशेष अभिषेकम और शोभायात्राएं होती हैं, जबकि श्रद्धालु पृथ्वी और समस्त जीवों की रक्षा के पवित्र कर्तव्य पर चिंतन करते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

श्रद्धालु व्रत, अभिषेकम, पाठ तथा भू देवी को सम्मानित करने वाले अर्पणों के माध्यम से भगवान वराह की पूजा करते हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सुबह जल्दी स्नान करें और सात्विक व्रत रखें, अनाज, मांस, मदिरा तथा तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • भू देवी को उठाते हुए भगवान वराह की प्रतिमा या मूर्ति वेदी पर स्थापित करें।
  • पंचामृत से अभिषेकम करें, उसके बाद जल, शहद और चंदन के लेप से।
  • लाल और पीले पुष्प, तुलसीदल, तिल तथा गुड़-तिल से बनी मिठाई अर्पित करें।
  • वराह स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम तथा भागवत पुराण के वराह-प्रसंग का पाठ करें; भोजन और जल का दान करें।

व्रत कथा: भू देवी का उद्धार

शक्ति के मद में चूर दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को लपेटकर आदि जल में डुबो दिया और देवताओं को चुनौती दी। सृष्टि अपना आधार खोने से समस्त ब्रह्मांड कांप उठा।

भगवान विष्णु ने एक विशालकाय शूकर, वराह, का रूप धारण किया और ब्रह्मांडीय सागर में कूद पड़े। अपने दांतों से उन्होंने भू देवी को गहराइयों से उठा लिया।

वराह ने फिर हिरण्याक्ष से एक सहस्र वर्षों तक युद्ध किया और अंततः उसका वध कर दिया, पृथ्वी को उसकी कक्षा में पुनर्स्थापित करते हुए तथा समस्त जीवों के लिए ब्रह्मांडीय व्यवस्था को सुरक्षित करते हुए।

Varaha Jayanti: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: Varaha Jayanti किस तिथि को मनाया जाता है?

भाद्रपद शुक्ल तृतीया; स्वामी Gauri, Jaya Tithi।

प्रश्न: वराह किसका प्रतिनिधित्व करते हैं?

वे दिव्य शक्ति, पर्यावरण संरक्षण, और ब्रह्मांडीय संतुलन की पुनर्स्थापना का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न: क्या वराह जयंती केवल शूकर रूप के विषय में है?

शूकर रूप यह दर्शाता है कि दिव्यता अपनी सृष्टि की रक्षा के लिए कोई भी रूप धारण कर सकती है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।