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वट सावित्री व्रत

त्यौहार

अन्य नाम: Vat Purnima Vrat, Vat Savitri Vrat

त्वरित जानकारी

2037 में तारीख
गुरुवार, 14 मई 2037
तिथि
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
11:04 am, 14 मई से 11:24 am, 15 मई तक
चंद्र मास
ज्येष्ठ · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Vat Savitri Vrat
2037 पर्व तिथि और मुहूर्त

वट सावित्री व्रत

गुरुवार, 14 मई 2037

चंद्र मास: ज्येष्ठ

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:11:04 am, 14 मई
तिथि समाप्ति:11:24 am, 15 मई

वट सावित्री व्रत: मुख्य तथ्य

वट सावित्री व्रत का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग वैशाख कृष्ण अमावस्या कहता है।

तिथि नियम
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)कृष्ण अमावस्याज्येष्ठ मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Pitra · Purna Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
शनि जयंतीभावुका अमावस्या

इस दिन का पंचांग

वट सावित्री व्रत · 14 मई 2037

वारगुरुवार
तिथिअमावस्या अमावस्या11:04 am → 11:24 am
नक्षत्रअश्विनी01:40 am → 03:20 am
योगसौभाग्य
करणचतुष्पाद
चंद्र मासवैशाख
ब्रह्म मुहूर्त04:07 am → 04:49 am
अभिजित मुहूर्त11:50 am → 12:44 pm
निशिता मुहूर्त11:56 pm → 12:38 am
राहु काल01:59 pm → 03:41 pm

वट सावित्री व्रत के बारे में

वट सावित्री व्रत विवाहित हिंदू महिलाओं द्वारा अपने पतियों की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला एक शक्तिशाली व्रत दिवस है।

यह राजकुमारी सावित्री की भक्ति का सम्मान करता है, जिसने यमराज (मृत्यु के देवता) को धोखा देकर अपने मृत पति सत्यवान का जीवन वापस पाया।

व्रत विधि और उपवास नियम

महिलाएं व्रत रखती हैं, दुल्हन के श्रृंगार में सजती हैं, और बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) के चारों ओर पवित्र धागे बांधती हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • बरगद के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें, उसके तने के चारों ओर कच्चा पीला/लाल सूती धागा बांधते हुए।

वट सावित्री व्रत: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: वट सावित्री व्रत किस तिथि को मनाया जाता है?

ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (अमांत पंचांग में वैशाख कृष्ण अमावस्या); स्वामी Pitra, Purna Tithi।

प्रश्न: 2037 में वट सावित्री व्रत की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण अमावस्या: 11:04 am, गुरु, 14 मई 2037 से 11:24 am, शुक्र, 15 मई 2037 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: वट सावित्री व्रत की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

शनि जयंती और भावुका अमावस्या (ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या)।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।