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विक्रमी संवत्सर समाप्त

त्यौहार

अन्य नाम: Vikrami Samvatsara ends

त्वरित जानकारी

2032 में तारीख
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2032
तिथि
चैत्र कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
10:34 am, 09 अप्रैल से 08:09 am, 10 अप्रैल तक
चंद्र मास
चैत्र · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Vikrami Samvatsara ends
2032 पर्व तिथि और मुहूर्त

विक्रमी संवत्सर समाप्त

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2032

चंद्र मास: चैत्र

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:10:34 am, 09 अप्रैल
तिथि समाप्ति:08:09 am, 10 अप्रैल

विक्रमी संवत्सर समाप्त: मुख्य तथ्य

विक्रमी संवत्सर समाप्त का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पंद्रहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग फाल्गुन कृष्ण अमावस्या कहता है।

तिथि नियम
चैत्र कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत)कृष्ण अमावस्याचैत्र मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Pitra · Purna Tithi

आने वाले वर्षों में चैत्र कृष्ण अमावस्या

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203303:05 am, बुध, 30 मार्च11:22 pm, बुध, 30 मार्च
203406:49 pm, रवि, 19 मार्च03:45 pm, सोम, 20 मार्च
203506:38 pm, शनि, 7 अप्रैल04:28 pm, रवि, 8 अप्रैल
203601:55 am, गुरु, 27 मार्च02:27 am, शुक्र, 28 मार्च
203702:37 am, सोम, 16 मार्च05:06 am, मंगल, 17 मार्च

इस दिन का पंचांग

विक्रमी संवत्सर समाप्त · 9 अप्रैल 2032

वारशुक्रवार
तिथिअमावस्या अमावस्या10:34 am → 08:09 am
नक्षत्रउत्तर भाद्रपद05:33 pm → 03:40 pm
योगइन्द्र
करणचतुष्पाद
चंद्र मासफाल्गुन
ब्रह्म मुहूर्त04:31 am → 05:16 am
अभिजित मुहूर्त11:57 am → 12:48 pm
निशिता मुहूर्त11:59 pm → 12:44 am
राहु काल10:47 am → 12:22 pm

विक्रमी संवत्सर समाप्त के बारे में

विक्रमी संवत्सर समाप्ति विक्रम संवत कैलेंडर के वर्ष के अंतिम दिन का प्रतीक है — यह उत्तर और पश्चिम भारत में व्यापक रूप से प्रचलित एक ऐतिहासिक हिंदू चंद्र-सौर पंचांग है। यह चैत्र मास के अंतिम दिन, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तथा गुड़ी पड़वा, उगादी अथवा नवरेह के उत्सवों के आगमन से ठीक पहले पड़ता है।

यह दिन परंपरागत रूप से पुराने खातों को बंद करने, ऋणों का निपटारा करने, बीते वर्ष की शिकायतों को क्षमा करने तथा जाते हुए वर्ष के व्यर्थ बोझ को त्यागने के लिए उपयोग किया जाता है। घर-परिवार अपने घरों को स्वच्छ करते हैं और सजाते हैं, प्रतीकात्मक रूप से नए आरंभों के लिए स्थान बनाते हुए।

ज्योतिषीय दृष्टि से, यह संक्रमण पितृ-कृतज्ञता, दान तथा आगामी वर्ष के लिए प्रार्थनाओं का एक शक्तिशाली क्षण है। व्यवसायी लोग चोपड़ा पूजन (खातों की पुस्तकों की पूजा) करते हैं और देवी लक्ष्मी तथा भगवान गणेश का आशीर्वाद मांगते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह अनुष्ठान पूर्णता, शुद्धिकरण तथा आगामी विक्रम संवत वर्ष की तैयारी पर केंद्रित है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें, तथा बीते वर्ष में उनके आशीर्वाद के लिए पूर्वजों को तर्पण या प्रार्थना अर्पित करें।
  • घर और कार्यस्थल को भलीभांति साफ करें; टूटी हुई वस्तुओं को त्यागें और यथासंभव बकाया ऋणों का निपटारा करें।
  • चोपड़ा पूजन करें अथवा अपने खातों, बहीखातों तथा उपकरणों की कुमकुम, हल्दी और पुष्पों से पूजा करें।
  • ब्राह्मणों, निर्धनों तथा सेवा-प्रदाताओं को भोजन, वस्त्र तथा अनाज दान करें।
  • संध्या के समय दीप जलाएं और समृद्ध नए संवत्सर के लिए भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी तथा कुलदेवता से प्रार्थना करें।

विक्रमी संवत्सर समाप्त: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: विक्रमी संवत्सर समाप्त किस तिथि को मनाया जाता है?

चैत्र कृष्ण अमावस्या (अमांत पंचांग में फाल्गुन कृष्ण अमावस्या); स्वामी Pitra, Purna Tithi।

प्रश्न: 2032 में विक्रमी संवत्सर समाप्त की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण अमावस्या: 10:34 am, शुक्र, 9 अप्रैल 2032 से 08:09 am, शनि, 10 अप्रैल 2032 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2033 में विक्रमी संवत्सर समाप्त की तिथि कब है?

चैत्र कृष्ण अमावस्या: 03:05 am, बुध, 30 मार्च 2033 से 11:22 pm, बुध, 30 मार्च 2033 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: क्या विक्रमी संवत्सर समाप्ति गुड़ी पड़वा के समान है?

नहीं, यह जाते हुए वर्ष का अंतिम दिन है; गुड़ी पड़वा/उगादी नए विक्रम संवत वर्ष का पहला दिन है।

प्रश्न: चोपड़ा पूजन क्यों किया जाता है?

यह खातों की पुस्तकों को पवित्र करता है और नए वर्ष में ईमानदार तथा लाभकारी व्यापार के लिए दिव्य आशीर्वाद मांगता है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।