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Rathayatra

ISKCON

अन्य नाम: Rath Yatra, Jagannath Chariot Festival

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Rathayatra
2026 ISKCON तिथि

Rathayatra

Rathayatra के बारे में

रथयात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का भव्य रथ उत्सव है, जो प्रतिवर्ष ओडिशा के पुरी में आयोजित होता है। तीनों देवताओं को विशाल काष्ठ रथों पर विराजमान किया जाता है और लाखों भक्त उन्हें गलियों से होकर खींचते हैं।

रथयात्रा का महत्व अत्यंत गहरा है - यह भगवान की मंदिर से निकलकर गलियों तक की यात्रा को दर्शाता है, ताकि जो लोग मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं कर सकते, वे भी उनकी कृपा प्राप्त कर सकें।

इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद ने 1967 में सैन फ्रांसिस्को से आरंभ करते हुए विश्व भर के 100 से अधिक शहरों में रथयात्रा उत्सव की स्थापना की।

व्रत विधि और उपवास नियम

यह मुख्यतः एक उत्सवात्मक पर्व है, न कि उपवास का अवसर।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • उत्सव में सम्मिलित होने से पूर्व शीघ्र उठें और स्नान करें।
  • भक्तिपूर्वक रथ खींचने में भाग लें।
  • रथों के गलियों से गुजरने के दौरान ऊंचे स्वर में पवित्र नामों का जप करें।
  • दिन भर महाप्रसाद का वितरण और ग्रहण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा कौन हैं?

जगन्नाथ भगवान कृष्ण हैं, बलदेव उनके बड़े भाई बलराम हैं, और सुभद्रा उनकी छोटी बहन हैं।

प्रश्न: देवता काष्ठ के क्यों बने होते हैं?

काष्ठ देवता (दारुब्रह्म) एक अनूठा स्वरूप हैं, जो भगवान विष्णु के निर्देशानुसार एक विशेष नीम वृक्ष से तराशे गए हैं।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।