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Bhishma Ashtami

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Bhishma Ashtami
2026 Kannada तिथि

Bhishma Ashtami

Bhishma Ashtami के बारे में

भीष्म अष्टमी माघ मास (जनवरी-फरवरी) के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह कौरवों और पांडवों के पितामह भीष्म के देहत्याग की स्मृति में मनाई जाती है।

महाभारत के अनुसार, भीष्म 58 दिनों तक बाणों की शय्या पर लेटे रहे, इसके बाद उन्होंने इस शुभ दिन अपना शरीर त्यागने का निर्णय लिया।

भक्त इस दिन विशेष पूजा, उपवास और विष्णु सहस्रनाम के पाठ के साथ मनाते हैं, जिसका पाठ स्वयं भीष्म ने अपनी मृत्युशय्या पर किया था।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त हल्का उपवास रखते हैं और आध्यात्मिक पुण्य के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
  • हल्का उपवास रखें या केवल फल और दूध ग्रहण करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • मंदिरों में जाएँ और प्रार्थना करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: शाम की पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
विष्णु सहस्रनाम ग्रंथफूल और मालाअगरबत्ती और कपूरपवित्र जल
पूजा प्रक्रिया:
  1. फूलों और सजावट के साथ विष्णु वेदी तैयार करें।
  2. भक्तिपूर्वक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  3. भगवान विष्णु से प्रार्थना करें।
  4. भक्तों में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: भीष्म अष्टमी का महत्व क्या है?

यह पितामह भीष्म की स्मृति में मनाई जाती है, जिन्होंने विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने के बाद इस शुभ दिन अपना शरीर त्यागने का निर्णय लिया था।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।