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Mithuna Sankranti

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Mithuna Sankranti
2026 Kannada तिथि

Mithuna Sankranti

Mithuna Sankranti के बारे में

मिथुन संक्रांति हिंदू पंचांग में सूर्य के मिथुन (Gemini) राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह पवित्र स्नान, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माना जाता है।

भक्त सुबह जल्दी नदियों और तालाबों में स्नान करते हैं तथा स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए सूर्य देव को प्रार्थना अर्पित करते हैं।

इस सौर संक्रमण को चिह्नित करने के लिए मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है और परिवार पारंपरिक भोजन साझा करते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त इस सौर संक्रमण के अवसर पर पवित्र स्नान करते हैं और हल्का व्रत रखते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले उठें और पवित्र स्नान करें।
  • जल और फूलों के साथ सूर्य देव को प्रार्थना अर्पित करें।
  • नए कार्यों और निर्माण कार्य की शुरुआत करें।
  • परिवार के साथ उत्सव का भोजन साझा करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: प्रातःकालीन पूजा और पवित्र स्नान के बाद व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
सूर्य पूजा के लिए जलफूल और मालाचावल और कुमकुमफल और मिठाई
पूजा प्रक्रिया:
  1. सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करें।
  2. उदीयमान सूर्य को जल अर्पित करें।
  3. फूलों और धूप से विष्णु पूजा करें।
  4. परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: मिथुन संक्रांति का क्या महत्व है?

यह सूर्य के मिथुन (Gemini) राशि में प्रवेश और नए सौर मास के आरंभ का प्रतीक है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।