Mohini Ekadashi
Kannada
Mohini Ekadashi
Mohini Ekadashi के बारे में
मोहिनी एकादशी वैशाख मास (अप्रैल-मई) के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। यह भगवान विष्णु के मोहिनी (मोहक स्त्री) रूप को समर्पित है।
पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान दिव्य अमृत बांटने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था।
भक्त कठोर उपवास रखते हैं, विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं और पूरा दिन प्रार्थना व ध्यान में व्यतीत करते हैं। विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है।
व्रत विधि और उपवास नियम
आदर्श रूप से बिना अन्न-जल के कठोर उपवास रखा जाता है।
- सूर्योदय से पहले स्नान करें।
- विष्णु सहस्रनाम का जाप करें और पूजा-अर्चना करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और नकारात्मक विचारों से बचें।
- पूरा दिन प्रार्थना और ध्यान में व्यतीत करें।
पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है।
पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण
- फूलों और तुलसी पत्तों से विष्णु वेदी तैयार करें।
- भगवान विष्णु को पंचामृत और पवित्र जल अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम का जाप करें और आरती करें।
- भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह दिव्य अमृत के वितरण के समय भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की स्मृति में मनाया जाता है। इस व्रत को रखने से पापों का नाश होकर मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता है।
टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।
आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।
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