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Sharad Purnima

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Sharad Purnima
2026 Kannada तिथि

Sharad Purnima

Sharad Purnima के बारे में

शरद पूर्णिमा आश्विन मास (सितंबर-अक्टूबर) की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है। यह वर्षा ऋतु के अंत और शरद ऋतु के आरंभ का प्रतीक है।

इस दिन श्रद्धालु पूरी रात जागते हैं, माँ लक्ष्मी की आराधना करते हैं और समृद्धि तथा आशीर्वाद के लिए उनके मंत्रों का जाप करते हैं।

कर्नाटक में यह पर्व पारंपरिक अनुष्ठानों, भक्ति गायन और सामुदायिक समारोहों के साथ मनाया जाता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

श्रद्धालु पूरी रात जागकर माँ लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • पूरी रात जागते रहें।
  • माँ लक्ष्मी की विशेष पूजा करें।
  • पूरी रात लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें।
  • परिवार और मित्रों के साथ उत्सव का भोजन साझा करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: रात्रि पूजा और भक्ति में व्यतीत की जाती है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्रफूल और मालाफल और मिठाइयाँधूप और कपूरतेल के दीये
पूजा प्रक्रिया:
  1. फूलों और सजावट से लक्ष्मी वेदी सजाएँ।
  2. पूरी रात माँ लक्ष्मी को प्रार्थना अर्पित करें।
  3. लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
  4. श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: शरद पूर्णिमा का क्या महत्व है?

यह वर्षा ऋतु के अंत का प्रतीक है और माँ लक्ष्मी को समर्पित है, जिसमें श्रद्धालु उनके आशीर्वाद के लिए पूरी रात जागते हैं।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।