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Dwijapriya Sankashti

Marathi

अन्य नाम: Dwijapriya Sankashti Chaturthi

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Dwijapriya Sankashti
2026 Marathi तिथि

Dwijapriya Sankashti

Dwijapriya Sankashti के बारे में

द्विजप्रिय संकष्टी भगवान गणेश को समर्पित बारह मासिक संकष्टी चतुर्थी व्रतों में से एक है। 'द्विजप्रिय' का अर्थ है 'द्विज (द्विजन्मे) को प्रिय'।

भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और चंद्रदर्शन के बाद उसे खोलते हैं। दूर्वा और मोदक के साथ विशेष पूजा की जाती है।

माना जाता है कि यह व्रत बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।

व्रत विधि और उपवास नियम

भक्त चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं और बुद्धि प्राप्ति के लिए गणेश पूजा करते हैं।

संकल्प मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः। बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद माँगा जाता है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
  • पूरे दिन बिना भोजन के उपवास रखें।
  • शाम को दूर्वा और मोदक के साथ गणेश पूजा करें।
  • चंद्रदर्शन के बाद उपवास खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: 'द्विजप्रिय' का क्या अर्थ है?

द्विजप्रिय का अर्थ है 'द्विज (द्विजन्मे) को प्रिय'। यह भगवान गणेश के बारह नामों में से एक है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।