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Baruthini Ekadashi

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Baruthini Ekadashi
2026 Nepali तिथि

Baruthini Ekadashi

Baruthini Ekadashi के बारे में

बरूथिनी एकादशी चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) के पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाई जाती है।

पद्म पुराण के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से श्रद्धालु पापों से मुक्त होते हैं और उन्हें आध्यात्मिक पुण्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालु कठोर व्रत रखते हैं, विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं और पूरा दिन प्रार्थना एवं ध्यान में व्यतीत करते हैं। विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

व्रत विधि और उपवास नियम

आदर्श रूप से बिना अन्न-जल ग्रहण किए कठोर व्रत रखा जाता है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले स्नान करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का जाप कर पूजा-अर्चना करें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • दिन भर प्रार्थना और ध्यान में समय व्यतीत करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीरतुलसी के पत्तेपीले पुष्प और मालापंचामृतधूप और कपूर
पूजा प्रक्रिया:
  1. पुष्प और तुलसी के पत्तों से विष्णु वेदी सजाएं।
  2. भगवान विष्णु को पंचामृत और पवित्र जल अर्पित करें।
  3. विष्णु सहस्रनाम का जाप कर आरती करें।
  4. श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: बरूथिनी एकादशी का क्या महत्व है?

माना जाता है कि बरूथिनी एकादशी का व्रत रखने से पाप नष्ट होते हैं, आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।