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Bhauma Pradosh Vrat

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Bhauma Pradosh Vrat
2026 Nepali तिथि

Bhauma Pradosh Vrat

Bhauma Pradosh Vrat के बारे में

भौम प्रदोष व्रत तब मनाया जाता है जब प्रदोष तिथि मंगलवार को पड़ती है। यह भगवान शिव को समर्पित है और अत्यंत शुभ माना जाता है।

श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं और प्रदोष काल (संध्या का समय) में शिव मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना एवं अभिषेक करते हैं।

यह पर्व शिव मंदिरों में अत्यंत भक्तिभाव से मनाया जाता है, जहां संध्या भर विशेष भजन और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

पूरे दिन कठोर व्रत रखा जाता है और प्रदोष काल में शिव पूजा की जाती है।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले जागकर स्नान करें।
  • पूरे दिन संपूर्ण व्रत रखें।
  • प्रदोष काल (संध्या) में शिव मंदिर जाएं।
  • दूध और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: संध्या की प्रदोष पूजा के पश्चात फल और सात्विक भोजन से व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
शिवलिंग या तस्वीरबिल्व पत्र (बेल पत्र)अभिषेक के लिए दूध और जलपुष्प और मालाधूप और अगरबत्ती
पूजा प्रक्रिया:
  1. शिव वेदी को साफ करें और पूजा स्थल तैयार करें।
  2. भगवान शिव को बिल्व पत्र और पुष्प अर्पित करें।
  3. दूध और जल से अभिषेक करें।
  4. 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर आरती करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: प्रदोष काल क्या है?

प्रदोष काल संध्या के समय की वह अवधि है, जो सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद तक रहती है, और भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।