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Sarvasammata Padmini Ekadashi

Odia

अन्य नाम: Padmini Ekadashi

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Sarvasammata Padmini Ekadashi
2026 Odia तिथि

Sarvasammata Padmini Ekadashi

Sarvasammata Padmini Ekadashi के बारे में

सर्वसम्मत पद्मिनी एकादशी चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस एकादशी को सभी आध्यात्मिक आचार्यों द्वारा सर्वसम्मत रूप से सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है, जो सर्वोच्च आध्यात्मिक पुण्य प्रदान करती है।

पद्म पुराण में कहा गया है कि सभी एकादशियों में पद्मिनी सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि यह अत्यंत पतित आत्माओं को भी मुक्ति प्रदान करती है। पुराण में पद्मिनी नामक एक स्त्री की कथा है, जो निर्धनता और कष्ट में जीवन व्यतीत करती थी किंतु उसने भगवान विष्णु में अपनी आस्था कभी नहीं खोई। उसने इस एकादशी का व्रत जो भी सामग्री जुटा सकी -- मुट्ठी भर चावल, कुछ फूल और शुद्ध भक्ति -- उसी से किया। भगवान उसके समक्ष प्रकट हुए, उसके चरणों को दिव्य कृपा के कमल (पद्म) से स्पर्श किया, और उसे वैकुंठ में शाश्वत स्थान प्रदान किया गया। 'पद्मिनी' नाम का अर्थ ही है 'कमल-चरण वाली', जो भगवान की अपने भक्तों के प्रति कोमल कृपा का प्रतीक है।

ओडिशा में सर्वसम्मत पद्मिनी एकादशी अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। भक्त अन्न रहित व्रत रखते हैं, विस्तृत विष्णु पूजा करते हैं, और दिन भर गहन ध्यान में व्यतीत करते हैं। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने के बाद द्वादशी को व्रत खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह एकादशी अन्य सभी एकादशियों के संयुक्त पुण्य के समान फल देती है, जिससे यह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति चाहने वालों के लिए सर्वोच्च अनुष्ठान बन जाती है।

व्रत विधि और उपवास नियम

सर्वोच्च आध्यात्मिक पुण्य के लिए कठोर व्रत। संपूर्ण उपवास रखें, दिन भर प्रार्थना और ध्यान करें, और द्वादशी को व्रत खोलें।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • दिन भर संपूर्ण उपवास रखें।
  • पूरा दिन प्रार्थना और विष्णु मंत्रों के जाप में व्यतीत करें।
  • एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • विष्णु पूजा करने के बाद द्वादशी को व्रत खोलें।

पारण (उपवास तोड़ने) संबंधी टिप्पणी: विष्णु पूजा के बाद द्वादशी को सात्विक भोजन से व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री और अनुष्ठान चरण

आवश्यक पूजा सामग्री:
भगवान विष्णु के लिए फूल और मालातुलसी के पत्तेअगरबत्ती और मिट्टी के दीयेफल और मिठाइयाँअर्पण हेतु जल और दूध
पूजा प्रक्रिया:
  1. सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
  2. भगवान विष्णु की पूजा करें और फूल अर्पित करें।
  3. दिन भर विष्णु मंत्रों का जाप करें।
  4. देवता को तुलसी पत्र और प्रसाद अर्पित करें।
  5. पूजा के बाद द्वादशी को व्रत खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: सर्वसम्मत पद्मिनी एकादशी का क्या महत्व है?

सर्वसम्मत पद्मिनी एकादशी चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।