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Atla Tadde

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अन्य नाम: Atla Tadde Vratam

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Atla Tadde
2026 Telugu तिथि

Atla Tadde

Atla Tadde के बारे में

अटला तद्दे आंध्र प्रदेश में विवाहित महिलाओं द्वारा मार्गशीर्ष मास (नवंबर-दिसंबर) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला त्योहार है। यह देवी गौरी को समर्पित है।

महिलाएँ अपने पतियों की दीर्घायु और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और विशेष पूजा करती हैं। वे चावल के आटे और गुड़ से पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं।

यह त्योहार पति-पत्नी के बीच के बंधन को मजबूत करता है और पारंपरिक गीतों तथा अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। महिलाएँ उपहारों का आदान-प्रदान करती हैं और दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए मंदिरों में जाती हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

विवाहित महिलाएँ अटला तद्दे पर व्रत रखती हैं और अपने पतियों की भलाई के लिए पूजा करती हैं।

संकल्प मंत्र

ॐ गौर्यै नमः, अपने पति और परिवार के स्वास्थ्य तथा दीर्घायु के लिए देवी गौरी का आशीर्वाद माँगता/माँगती हूँ।

चरणबद्ध उपवास प्रक्रिया:
  • जल्दी उठें और स्नान करें।
  • व्रत रखें और पूजा पूर्ण होने के बाद ही भोजन करें।
  • चावल के आटे और गुड़ से पारंपरिक व्यंजन तैयार करें।
  • गौरी पूजा करें और परिवार के लिए आशीर्वाद माँगें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: अटला तद्दे का क्या महत्व है?

अटला तद्दे विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पतियों की भलाई और दीर्घायु के लिए मनाया जाता है। यह उत्तर भारत की करवा चौथ के समान है।

प्रश्न: अटला तद्दे पर कौन-से व्यंजन तैयार किए जाते हैं?

चावल के आटे, गुड़ और नारियल से बने विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं। ये पारंपरिक मिठाइयाँ देवी को अर्पित की जाती हैं और परिवार के सदस्यों में बाँटी जाती हैं।

टिप्पणी: सभी समय चयनित स्थान के स्थानीय समय में 24-घंटे प्रारूप में दर्शाए गए हैं, साथ में DST समायोजन (यदि लागू हो)।

आधी रात के बाद के समय के साथ अगले दिन की तारीख जोड़ी गई है। पंचांग में, एक दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू और समाप्त होता है।