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बुध अस्त

2026 बुध अस्त

नई दिल्ली

पारंपरिक निश्चित-कोण (दीप्तांश) पद्धति का उपयोग करके गणना की गई है — नीचे टिप्पणी देखें। जो पंचांग हीलिएकल-दृश्यता आधारित तारा अस्त गणना का उपयोग करते हैं, उनकी तिथियां इससे भिन्न हो सकती हैं।

बुध अस्त आरंभ

रविवार, 28 दिसंबर 2025, 00:15

बुध अस्त समाप्त

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026, 04:16

कुल अस्त अवधि = 44.2 दिन · 40.2 दिन 2026 में आते हैं

बुध अस्त आरंभ

शनिवार, 28 फ़रवरी 2026, 22:07

बुध अस्त समाप्त

शुक्रवार, 13 मार्च 2026, 22:09

कुल अस्त अवधि = 13 दिन

बुध अस्त आरंभ

शुक्रवार, 01 मई 2026, 23:16

बुध अस्त समाप्त

मंगलवार, 26 मई 2026, 23:24

कुल अस्त अवधि = 25 दिन

बुध अस्त आरंभ

रविवार, 05 जुलाई 2026, 09:12

बुध अस्त समाप्त

मंगलवार, 21 जुलाई 2026, 14:08

कुल अस्त अवधि = 16.2 दिन

बुध अस्त आरंभ

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026, 01:28

बुध अस्त समाप्त

रविवार, 13 सितंबर 2026, 18:35

कुल अस्त अवधि = 30.7 दिन

बुध अस्त आरंभ

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026, 06:04

बुध अस्त समाप्त

मंगलवार, 10 नवंबर 2026, 15:54

कुल अस्त अवधि = 11.4 दिन

बुध अस्त आरंभ

सोमवार, 07 दिसंबर 2026, 00:55

बुध अस्त समाप्त

शनिवार, 23 जनवरी 2027, 18:51

कुल अस्त अवधि = 47.7 दिन · 25 दिन 2026 में आते हैं

2026 में कुल अस्त दिन = 161.5 दिन

किसी ग्रह का अस्त होना वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण घटना है — हर वर्ष एक अवधि के लिए ग्रह सूर्य के इतने निकट आ जाता है कि वह दृष्टिगोचर नहीं रहता; इसे अस्त (या लोप) कहा जाता है। विशेष रूप से शुक्र और गुरु के अस्त काल के दौरान शुभ कार्य, विशेषकर विवाह, पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं।

इस पृष्ठ पर प्रयुक्त पद्धति (दीप्तांश / निश्चित-कोण अस्त): एक ग्रह को अस्त माना जाता है जब सूर्य से उसकी भूकेंद्रिक कोणीय दूरी एक निश्चित सीमा से नीचे आ जाती है — मंगल 17°, बुध 12–14°, शुक्र 8–10°, गुरु 11°, शनि 15° (वक्री होने पर संकीर्ण), ये पारंपरिक कोण हैं। यह हीलिएकल-दृश्यता आधारित तारा अस्त गणना (जिसका उपयोग कुछ अन्य पंचांग करते हैं) से एक भिन्न, समान रूप से पारंपरिक पद्धति है, जो इसके बजाय यह अनुमान लगाती है कि कोई ग्रह किसी दिए गए स्थान से वास्तव में कब अदृश्य/दृश्य होता है — जिसमें केवल कोणीय दूरी ही नहीं, बल्कि ऊंचाई (altitude), चमक और वायुमंडल को भी ध्यान में रखा जाता है। दोनों पद्धतियां एक ही ग्रह और वर्ष के लिए उल्लेखनीय रूप से भिन्न आरंभ/समाप्ति तिथियां दे सकती हैं।