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रवि प्रदोष व्रत तिथियां

रवि प्रदोष

2026 में 5 अवसर — रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत — सूर्य पूजा को शिव पूजा के साथ जोड़ते हुए अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए रखा जाता है।
फ़रवरी 2026
फाल्गुन त्रयोदशी
15फ़रवरी 2026, रविवार
फाल्गुन त्रयोदशी
फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशीप्रारंभ: 04:02 pm, 14 फ़र॰समाप्ति: 05:05 pm, 15 फ़र॰
waning crescentकृष्ण त्रयोदशी
मार्च 2026
चैत्र त्रयोदशी
01मार्च 2026, रविवार
चैत्र त्रयोदशी
चैत्र, शुक्ल त्रयोदशीप्रारंभ: 08:44 pm, 28 फ़र॰समाप्ति: 07:10 pm, 01 मार्च
waxing gibbousशुक्ल त्रयोदशी
जुलाई 2026
आषाढ त्रयोदशी
12जुलाई 2026, रविवार
आषाढ त्रयोदशी
आषाढ, कृष्ण त्रयोदशीप्रारंभ: 02:05 am, 12 जुल॰समाप्ति: 10:30 pm, 12 जुल॰
waning crescentकृष्ण त्रयोदशी
नवंबर 2026
मार्गशीर्ष त्रयोदशी
22नवंबर 2026, रविवार
मार्गशीर्ष त्रयोदशी
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशीप्रारंभ: 04:57 am, 22 नव॰समाप्ति: 02:38 am, 23 नव॰
waxing gibbousशुक्ल त्रयोदशी
दिसंबर 2026
मार्गशीर्ष त्रयोदशी
06दिसंबर 2026, रविवार
मार्गशीर्ष त्रयोदशी
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशीप्रारंभ: 12:53 am, 06 दिस॰समाप्ति: 02:23 am, 07 दिस॰
waning crescentकृष्ण त्रयोदशी

रवि प्रदोष के बारे में

रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत — सूर्य पूजा को शिव पूजा के साथ जोड़ते हुए अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए रखा जाता है।

शास्त्रीय मुहूर्त विवरण

स्वभाव एवं विशेषण

त्रयोदशी। त्रयोदशी (जया प्रदा: विजय दिलाने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार कामदेव (काम के स्वामी)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में कामदेव, कृष्ण पक्ष में सूर्य। बृहत् संहिता में काम बताया गया है।

अनुमत कार्य

अलंकार, प्रतिष्ठा, अग्नि-आधान, विवाह, यात्रा, गृह-प्रवेश, वस्त्र, युद्ध, उपनयन को छोड़कर सभी मांगलिक कार्य। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी एवं दशमी तिथियों हेतु नियत कार्य त्रयोदशी तिथि में भी फलित होते हैं।

निषिद्ध कार्य एवं भोजन

उपनयन से बचें। निषिद्ध भोजन: श्रीफल, बेल (Aegle Marmelos), बैंगन। त्रयोदशी तिथि को शरीर पर उबटन नहीं लगाना चाहिए (धन का नाश करता है)। त्रयोदशी को आंवला स्नान नहीं करना चाहिए।

वर्गीकरण एवं विशेषताएं

नंदादि समूह
जया तिथि (स्वामी: मंगल)। शुक्ल पक्ष नाम: धर्मिणी; कृष्ण पक्ष नाम: लक्ष्मीवती।
नेत्र स्थिति
शुक्ल पक्ष में दो-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि।
कुल समूह
अकुल तिथि।
अमृत-घटी
49वीं से 52वीं घटी (आरंभ से 19घं 12मि से 20घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 153°36'00" से 154°12'00")।
विष-घटी
13वीं से 16वीं घटी (आरंभ से 4घं 48मि से 6घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 146°24'00" से 147°12'00") [वसिष्ठ: 9-12; दैवज्ञ/M.G.: 15-18]।
निषिद्ध अवधि
7वीं घटी पर तिथि कूपम्। प्रदोष: प्रथम दो पहर (लगभग 6घं / 1/4वां भाग)। कृष्ण पक्ष में गलग्रह तिथि।
मास शून्य
ज्येष्ठ (शुक्ल पक्ष)।
दग्ध तिथि
सूर्य धनु राशि में (कृष्ण पक्ष)।
वार दग्ध
सोमवार (दैवज्ञ रामदीन)।
तिथि-शून्य नक्षत्र
चित्रा, स्वाती।
तिथि-शून्य लग्न
वृषभ, मीन (अथवा मेष)।
अशुभ लग्न
मिथुन, कन्या (जया तिथियां)।
घात तिथियां
सिंह, धनु, कुंभ जन्म राशियों के लिए घात। मेष राशि के लिए अशुभ।
विशेष योग
गुरुवार (सिद्ध/अमृत योग), शनिवार (रत्नाकुर योग), शुक्रवार (मृत्यु योग), सोमवार (करकच योग)।
दिशा शूल एवं योगिनी
दिक् शूल: दक्षिण; योगिनी: दक्षिण।

शांति एवं दान

13 ब्राह्मणों को स्नान कराएं, उन्हें सजाएं, वस्तुएं, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान करें एवं उन्हें भोजन कराएं।