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गीता जयंती

त्यौहार

अन्य नाम: Geeta Jayanti

त्वरित जानकारी

2026 में तारीख
शनिवार, 19 दिसंबर 2026
तिथि
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
10:10 pm, 19 दिस॰ से 08:15 pm, 20 दिस॰ तक
चंद्र मास
मार्गशीर्ष · शुक्ल पक्ष
इसी तिथि पर
गीता जयंती
कैलेंडर वर्ष चुनें
Geeta Jayanti
2026 पर्व तिथि और मुहूर्त

गीता जयंती

शनिवार, 19 दिसंबर 2026

चंद्र मास: मार्गशीर्ष

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:10:10 pm, 19 दिस॰
तिथि समाप्ति:08:15 pm, 20 दिस॰

गीता जयंती: मुख्य तथ्य

गीता जयंती का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारहवीं तिथि) को पड़ता है।

तिथि नियम
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (पूर्णिमांत)शुक्ल एकादशीमार्गशीर्ष मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Vishvedeva · Nanda Tithi
इसी तिथि के अन्य पर्व
गीता जयंती

इस दिन का पंचांग

गीता जयंती · 19 दिस॰ 2026

वारशनिवार
तिथिशुक्ल दशमी11:15 pm → 10:10 pm
नक्षत्ररेवती04:10 pm → 03:58 pm
योगपरिघ
करणगर
चंद्र मासमार्गशीर्ष
ब्रह्म मुहूर्त05:18 am → 06:13 am
अभिजित मुहूर्त11:57 am → 12:38 pm
निशिता मुहूर्त11:51 pm → 12:45 am
राहु काल09:43 am → 11:00 am

गीता जयंती के बारे में

गीता जयंती उस दिन का प्रतीक है जब भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में विषादग्रस्त अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है, जो मोक्षदा एकादशी के समान ही दिन है, और गीता — मुक्ति के दिव्य गीत — के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है।

अठारह अध्यायों और सात सौ श्लोकों से रचित भगवद्गीता कर्तव्य, भक्ति, ज्ञान और आत्मा की प्रकृति से जुड़े गहनतम प्रश्नों को संबोधित करती है। यह सिखाती है कि आसक्ति रहित होकर किया गया धार्मिक कर्म ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बनता है।

गीता जयंती पर मंदिरों, आश्रमों और घरों में संपूर्ण गीता का पाठ गूंजता है, जो प्रायः निरंतर पाठ (अखंड पाठ) के रूप में किया जाता है। यह दिन अंतर्मुखी होकर अपने कर्तव्यों की समीक्षा करने और जीवन के संघर्षों के बीच समभाव विकसित करने का निमंत्रण है।

व्रत विधि और उपवास नियम

गीता जयंती उपवास, भगवद्गीता के पाठ या जाप और उसकी शिक्षाओं पर चिंतन के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • जल्दी उठें, स्नान करें और फूलों से सुसज्जित स्वच्छ वेदी पर भगवद्गीता की एक प्रति रखें।
  • अन्न, दालों और कुछ सब्जियों से एकादशी का उपवास रखें; आवश्यकता पड़ने पर फल और दूध लें।
  • अकेले या सामूहिक अखंड पाठ में भगवद्गीता के सभी अठारह अध्यायों का पाठ करें या सुनें।
  • भगवान कृष्ण और गीता को तुलसी पत्र, फूल, धूप और घी का दीपक अर्पित करें।
  • किसी चुने हुए श्लोक या शिक्षा पर चिंतन करें और परिवार या साथी भक्तों के साथ उसके अर्थ पर चर्चा करें।
  • धर्म के ज्ञान को फैलाने के लिए गीता की प्रतियां, भोजन और वस्त्र दान करें।

व्रत कथा: युद्धभूमि पर कृष्ण का गीत

जब कुरुक्षेत्र युद्ध आरंभ होने वाला था, तब राजकुमार अर्जुन अपने ही स्वजनों से युद्ध करने के विचार से शोकाकुल हो उठे। उन्होंने अपने शस्त्र त्याग दिए और युद्ध करने से इनकार कर दिया।

भगवान कृष्ण, जो अर्जुन के सारथी और दिव्य मार्गदर्शक थे, ने उन्हें वह कालातीत उपदेश दिया जो आगे चलकर भगवद्गीता कहलाया। उन्होंने आत्मा की अमरता, कर्तव्य के महत्व और ज्ञान, भक्ति एवं निष्काम कर्म के मार्गों को समझाया।

अर्जुन के संदेह मिट गए, और उन्होंने स्पष्ट मन और दृढ़ हृदय के साथ अपना धनुष उठाया। इस प्रकार गीता ने निराशा के एक क्षण को शाश्वत ज्ञान के प्रकटीकरण में बदल दिया।

गीता जयंती इस दिव्य उपदेश का उत्सव है और साधकों को इसकी शिक्षाओं को अपने आंतरिक संघर्षों पर लागू करने की याद दिलाती है।

गीता जयंती: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: गीता जयंती किस तिथि को मनाया जाता है?

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी; स्वामी Vishvedeva, Nanda Tithi।

प्रश्न: 2026 में गीता जयंती की तिथि कब से कब तक है?

शुक्ल एकादशी: 10:10 pm, शनि, 19 दिस॰ 2026 से 08:15 pm, रवि, 20 दिस॰ 2026 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: गीता जयंती की तिथि पर और कौन से पर्व पड़ते हैं?

गीता जयंती (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी)।

प्रश्न: क्या गीता जयंती हमेशा एकादशी को होती है?

हां, यह मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को पड़ती है, जिसे मोक्षदा एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है।

प्रश्न: क्या गीता जयंती पर उपवास रखना आवश्यक है?

कई भक्त एकादशी का उपवास रखते हैं, परंतु भक्तिपूर्वक गीता को पढ़ना और उस पर चिंतन करना ही मुख्य अनुष्ठान है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।