महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ
त्यौहारअन्य नाम: Mahaluxmi Vrata begins, Mahaluxmi Vrata ends
त्वरित जानकारी
- 2026 में तारीख
- शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
- तिथि
- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (पूर्णिमांत)
- तिथि प्रारंभ से समाप्ति
- 01:02 pm, 18 सित॰ से 03:28 pm, 19 सित॰ तक
- चंद्र मास
- भाद्रपद · शुक्ल पक्ष
- इसी तिथि पर
- राधाष्टमी, राधा अष्टमी

महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
चंद्र मास: भाद्रपद
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ: मुख्य तथ्य
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (आठवीं तिथि) को पड़ता है।
- तिथि नियम
- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (पूर्णिमांत)शुक्ल अष्टमीभाद्रपद मास
- तिथि स्वामी और श्रेणी
- Shiva · Jaya Tithi
- इसी तिथि के अन्य पर्व
- राधाष्टमीराधा अष्टमी
आने वाले वर्षों में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी
इस दिन का पंचांग
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ · 18 सित॰ 2026
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ के बारे में
महालक्ष्मी व्रत देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र संकल्प है, जो धन, सद्गुण, साहस और गृहस्थ कल्याण की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी का महान स्वरूप हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति और परिवार की दीर्घायु तथा समृद्धि के लिए किया जाता है।
कई परंपराओं में यह व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी से आरंभ होकर सोलह दिनों तक चलता है और आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को समाप्त होता है। इस अवधि के दौरान देवी की प्रतिदिन सोलह उपचारों (षोडशोपचार पूजा) से आराधना की जाती है।
यह व्रत महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के अन्य भागों में लोकप्रिय है। इसमें पवित्रता, भक्ति, विवाहित महिलाओं के प्रति आतिथ्य और इस विश्वास पर विशेष बल दिया जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से घर से दरिद्रता, रोग और कलह दूर हो जाते हैं।
व्रत विधि और उपवास नियम
महालक्ष्मी कथा के मार्गदर्शन में महिलाएं सोलह दिनों तक कठोर उपवास, पूजा और दान का पालन करती हैं।
- प्रतिदिन सुबह जल्दी स्नान करें और घर में पूरी स्वच्छता बनाए रखें।
- देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा या कलश स्थापित करें और प्रतिदिन षोडशोपचार (सोलह उपचार) से उनकी पूजा करें।
- महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें और लक्ष्मी मंत्रों तथा लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली का जाप करें।
- पूरी अवधि के दौरान मांसाहार, मदिरा, लहसुन और प्याज का त्याग करते हुए आंशिक या पूर्ण उपवास रखें।
- समापन के दिन (उद्यापन) विवाहित महिलाओं को आमंत्रित करें, उन्हें भोजन कराएं, उपहार दें और निर्धनों को दान करें।
व्रत कथा: चारुमती का वरदान
चारुमती नामक एक भक्त महिला अपने पति और परिवार के साथ अत्यंत निर्धनता में रहती थी, फिर भी वह धर्मपरायण और आतिथ्यशील बनी रही। एक रात देवी महालक्ष्मी ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर सोलह दिनों का व्रत सिखाया।
चारुमती ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, प्रतिदिन देवी की पूजा की, ब्राह्मणों और विवाहित महिलाओं को भोजन कराया और पवित्रता बनाए रखी। उसका घर समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख से भर उठा।
उसका यह परिवर्तन देखकर नगर की अन्य महिलाओं ने भी महालक्ष्मी व्रत करना आरंभ कर दिया। तभी से विवाहित महिलाएं अपने घरों में महालक्ष्मी की सनातन उपस्थिति को आमंत्रित करने के लिए यह व्रत करती आ रही हैं।
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी; स्वामी Shiva, Jaya Tithi।
शुक्ल अष्टमी: 01:02 pm, शुक्र, 18 सित॰ 2026 से 03:28 pm, शनि, 19 सित॰ 2026 तक (भारतीय मानक समय)।
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी: 11:29 am, मंगल, 7 सित॰ 2027 से 12:45 pm, बुध, 8 सित॰ 2027 तक (भारतीय मानक समय)।
राधाष्टमी और राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)।
परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए है, परंतु कोई भी भक्त श्रद्धापूर्वक महालक्ष्मी की पूजा कर सकता है।
पवित्रता बनाए रखने के लिए मांसाहार, मदिरा, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है।
इसी चंद्र मास के पर्व
Bhadrapada
टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।
अनुशंसित पृष्ठ
तिथियों और त्यौहारों सहित संपूर्ण वार्षिक हिंदू कैलेंडर।
चंद्र तिथियों और खगोलीय घटनाओं का विस्तृत माह-वार दृश्य।
वर्षभर के लिए मराठी पंचांग और त्यौहार तिथियां।
गुजराती विक्रम संवत कैलेंडर और त्यौहार।
तेलुगु कैलेंडर और त्यौहार पंचांगम विवरण।
तमिल सौर कैलेंडर तिथियां और मासिक पंचांगम।