मुख्य सामग्री पर जाएँ
Yoga Panchang
लॉग इन करें

महालक्ष्मी व्रत समाप्त

त्यौहार

अन्य नाम: Mahaluxmi Vrata begins, Mahaluxmi Vrata ends

त्वरित जानकारी

2032 में तारीख
रविवार, 26 सितंबर 2032
तिथि
आश्विन कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
02:16 am, 26 सित॰ से 03:19 am, 27 सित॰ तक
चंद्र मास
आश्विन · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Mahaluxmi Vrata ends
2032 पर्व तिथि और मुहूर्त

महालक्ष्मी व्रत समाप्त

रविवार, 26 सितंबर 2032

चंद्र मास: आश्विन

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:02:16 am, 26 सित॰
तिथि समाप्ति:03:19 am, 27 सित॰

महालक्ष्मी व्रत समाप्त: मुख्य तथ्य

महालक्ष्मी व्रत समाप्त का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (आठवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग भाद्रपद कृष्ण अष्टमी कहता है।

तिथि नियम
आश्विन कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत)कृष्ण अष्टमीआश्विन मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Shiva · Jaya Tithi

आने वाले वर्षों में आश्विन कृष्ण अष्टमी

वर्षतिथि प्रारंभतिथि समाप्ति
203311:38 am, गुरु, 15 सित॰10:39 am, शुक्र, 16 सित॰
203412:29 pm, बुध, 4 अक्टू॰10:48 am, गुरु, 5 अक्टू॰
203509:16 am, सोम, 24 सित॰07:03 am, मंगल, 25 सित॰
203604:36 am, शनि, 13 सित॰03:14 am, रवि, 14 सित॰
203704:05 am, शुक्र, 2 अक्टू॰03:42 am, शनि, 3 अक्टू॰

इस दिन का पंचांग

महालक्ष्मी व्रत समाप्त · 26 सित॰ 2032

वाररविवार
तिथिकृष्ण अष्टमी02:16 am → 03:19 am
नक्षत्रमृगशिरा08:05 am → 09:14 am
योगवरीयान
करणबालव
चंद्र मासभाद्रपद
ब्रह्म मुहूर्त04:35 am → 05:23 am
अभिजित मुहूर्त11:48 am → 12:36 pm
निशिता मुहूर्त11:48 pm → 12:36 am
राहु काल04:42 pm → 06:12 pm

महालक्ष्मी व्रत समाप्त के बारे में

महालक्ष्मी व्रत देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र संकल्प है, जो धन, सद्गुण, साहस और गृहस्थ कल्याण की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी का महान स्वरूप हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति और परिवार की दीर्घायु तथा समृद्धि के लिए किया जाता है।

कई परंपराओं में यह व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी से आरंभ होकर सोलह दिनों तक चलता है और आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को समाप्त होता है। इस अवधि के दौरान देवी की प्रतिदिन सोलह उपचारों (षोडशोपचार पूजा) से आराधना की जाती है।

यह व्रत महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के अन्य भागों में लोकप्रिय है। इसमें पवित्रता, भक्ति, विवाहित महिलाओं के प्रति आतिथ्य और इस विश्वास पर विशेष बल दिया जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से घर से दरिद्रता, रोग और कलह दूर हो जाते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

महालक्ष्मी कथा के मार्गदर्शन में महिलाएं सोलह दिनों तक कठोर उपवास, पूजा और दान का पालन करती हैं।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • प्रतिदिन सुबह जल्दी स्नान करें और घर में पूरी स्वच्छता बनाए रखें।
  • देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा या कलश स्थापित करें और प्रतिदिन षोडशोपचार (सोलह उपचार) से उनकी पूजा करें।
  • महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें और लक्ष्मी मंत्रों तथा लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली का जाप करें।
  • पूरी अवधि के दौरान मांसाहार, मदिरा, लहसुन और प्याज का त्याग करते हुए आंशिक या पूर्ण उपवास रखें।
  • समापन के दिन (उद्यापन) विवाहित महिलाओं को आमंत्रित करें, उन्हें भोजन कराएं, उपहार दें और निर्धनों को दान करें।

व्रत कथा: चारुमती का वरदान

चारुमती नामक एक भक्त महिला अपने पति और परिवार के साथ अत्यंत निर्धनता में रहती थी, फिर भी वह धर्मपरायण और आतिथ्यशील बनी रही। एक रात देवी महालक्ष्मी ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर सोलह दिनों का व्रत सिखाया।

चारुमती ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, प्रतिदिन देवी की पूजा की, ब्राह्मणों और विवाहित महिलाओं को भोजन कराया और पवित्रता बनाए रखी। उसका घर समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख से भर उठा।

उसका यह परिवर्तन देखकर नगर की अन्य महिलाओं ने भी महालक्ष्मी व्रत करना आरंभ कर दिया। तभी से विवाहित महिलाएं अपने घरों में महालक्ष्मी की सनातन उपस्थिति को आमंत्रित करने के लिए यह व्रत करती आ रही हैं।

महालक्ष्मी व्रत समाप्त: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: महालक्ष्मी व्रत समाप्त किस तिथि को मनाया जाता है?

आश्विन कृष्ण अष्टमी (अमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी); स्वामी Shiva, Jaya Tithi।

प्रश्न: 2032 में महालक्ष्मी व्रत समाप्त की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण अष्टमी: 02:16 am, रवि, 26 सित॰ 2032 से 03:19 am, सोम, 27 सित॰ 2032 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: 2033 में महालक्ष्मी व्रत समाप्त की तिथि कब है?

आश्विन कृष्ण अष्टमी: 11:38 am, गुरु, 15 सित॰ 2033 से 10:39 am, शुक्र, 16 सित॰ 2033 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: क्या अविवाहित महिलाएं महालक्ष्मी व्रत रख सकती हैं?

परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए है, परंतु कोई भी भक्त श्रद्धापूर्वक महालक्ष्मी की पूजा कर सकता है।

प्रश्न: व्रत के दौरान किन खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है?

पवित्रता बनाए रखने के लिए मांसाहार, मदिरा, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।