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वत्स द्वादशी

त्यौहार

अन्य नाम: Gau-Vatsal2, Vatsa Dvadashi

त्वरित जानकारी

2033 में तारीख
रविवार, 21 अगस्त 2033
तिथि
भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (पूर्णिमांत)
तिथि प्रारंभ से समाप्ति
12:04 am, 21 अग॰ से 12:10 am, 22 अग॰ तक
चंद्र मास
भाद्रपद · कृष्ण पक्ष
कैलेंडर वर्ष चुनें
Vatsa Dvadashi
2033 पर्व तिथि और मुहूर्त

वत्स द्वादशी

रविवार, 21 अगस्त 2033

चंद्र मास: भाद्रपद

तिथि / मुहूर्त समय
तिथि प्रारंभ:12:04 am, 21 अग॰
तिथि समाप्ति:12:10 am, 22 अग॰

वत्स द्वादशी: मुख्य तथ्य

वत्स द्वादशी का दिन चंद्र पंचांग से तय होता है: यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी (बारहवीं तिथि) को पड़ता है, जिसे अमांत पंचांग श्रावण कृष्ण द्वादशी कहता है।

तिथि नियम
भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (पूर्णिमांत)कृष्ण द्वादशीभाद्रपद मास
तिथि स्वामी और श्रेणी
Vishnu · Bhadra Tithi

इस दिन का पंचांग

वत्स द्वादशी · 21 अग॰ 2033

वाररविवार
तिथिकृष्ण द्वादशी12:04 am → 12:10 am
नक्षत्रआर्द्रा07:28 am → 07:58 am
योगसिद्धि
करणकौलव
चंद्र मासश्रावण
ब्रह्म मुहूर्त04:25 am → 05:09 am
अभिजित मुहूर्त11:58 am → 12:50 pm
निशिता मुहूर्त12:02 am → 12:46 am
राहु काल05:16 pm → 06:54 pm

वत्स द्वादशी के बारे में

गोवत्स द्वादशी, जिसे वसु बारस, नंदिनी व्रत या बछ बारस भी कहा जाता है, गायों और बछड़ों को दिव्य धन के पवित्र स्वरूपों के रूप में सम्मानित करने वाला त्योहार है। यह अमांत परंपरा में आश्विन माह की या पूर्णिमांत परंपरा में कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष द्वादशी को, दीपावली उत्सव से ठीक पहले, पड़ता है।

गायों को इच्छापूर्ण दिव्य गाय कामधेनु का पार्थिव रूप माना जाता है। इस दिन गायों को भोजन कराना और उनकी पूजा करना देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करता है, दरिद्रता को दूर करता है और बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुख को सुनिश्चित करता है, ऐसा माना जाता है। इसलिए यह त्योहार माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

कई क्षेत्रों में गोवत्स द्वादशी पांच दिवसीय दीपावली उत्सव का प्रथम दिन मानी जाती है। परिवार जल्दी उठते हैं, गौशाला साफ करते हैं, पशुओं को स्नान कराते हैं और उन्हें खिलाने के लिए विशेष गेहूं आधारित व्यंजन बनाते हैं। यह उन पशुओं के प्रति कृतज्ञता का दिन है जो कृषि और मानव जीवन को सहारा देते हैं।

व्रत विधि और उपवास नियम

गोवत्स द्वादशी गायों की पूजा, सायंकाल तक उपवास और पशुओं को गेहूं आधारित भोजन अर्पित करने के साथ मनाई जाती है।

चरण-दर-चरण उपवास प्रक्रिया:
  • सूर्योदय से पहले जागें, स्नान करें और घर एवं गौशाला को अच्छी तरह साफ करें।
  • गायों और बछड़ों को स्वच्छ जल से स्नान कराएं; उनके माथे पर हल्दी-चंदन का तिलक लगाएं और उनके सींगों को मालाओं से सजाएं।
  • चपाती, मीठा दलिया या खीर जैसे गेहूं के व्यंजन तैयार करें और परिवार के भोजन से पहले उन्हें गायों को खिलाएं।
  • धूप, दीपक और कामधेनु के प्रति प्रार्थना के साथ सरल गौ-पूजा करें।
  • सायंकालीन गौ-पूजा पूर्ण होने तक उपवास रखें या केवल सात्विक भोजन करें।
  • गोवत्स द्वादशी कथा सुनें और गौशालाओं एवं जरूरतमंदों को अनाज, चारा या कंबल दान करें।

व्रत कथा: नंदिनी का व्रत

एक भक्त रानी संतान चाहती थीं और उन्होंने कई अनुष्ठान किए, परंतु सफलता नहीं मिली। एक दिन एक ऋषि ने उन्हें गोवत्स द्वादशी का व्रत रखने और माता कामधेनु के समान श्रद्धा से गाय की पूजा करने की सलाह दी।

द्वादशी के दिन रानी ने राजकीय गायों को स्नान कराया, उन्हें ताजे गेहूं के व्यंजन अर्पित किए और सच्चे मन से संतान के लिए प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर दिव्य गाय नंदिनी स्वप्न में प्रकट हुई और उन्हें आशीर्वाद दिया।

शीघ्र ही रानी गर्भवती हुई और उन्होंने एक स्वस्थ संतान को जन्म दिया। कृतज्ञता में उन्होंने गोवत्स द्वादशी पर गायों की पूजा की परंपरा स्थापित की।

तब से माताएं अपने बच्चों की भलाई और घर की समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।

वत्स द्वादशी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: वत्स द्वादशी किस तिथि को मनाया जाता है?

भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण द्वादशी); स्वामी Vishnu, Bhadra Tithi।

प्रश्न: 2033 में वत्स द्वादशी की तिथि कब से कब तक है?

कृष्ण द्वादशी: 12:04 am, रवि, 21 अग॰ 2033 से 12:10 am, सोम, 22 अग॰ 2033 तक (भारतीय मानक समय)।

प्रश्न: क्या गोवत्स द्वादशी का दीपावली से संबंध है?

हां, कई परंपराओं में यह पांच दिवसीय दीपावली उत्सव का पहला दिन है, जिसके बाद धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली और भाई दूज आते हैं।

प्रश्न: इस दिन गायों को कौन सा भोजन अर्पित किया जाता है?

चपाती, मीठा दलिया, खीर और गुड़ जैसे गेहूं से बने व्यंजन सामान्यतः अर्पित किए जाते हैं।

टिप्पणी: समय तारीख सहित दिए गए हैं; पंचांग का दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है।