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2026 पौष

नई दिल्ली (UTC+05:30) के लिए तिथियां — आपका स्थान मिलते ही आपके शहर की तिथियां दिखेंगी।

पौष हेमंत ऋतु में आता है, जो लगभग दिसंबर-जनवरी के अनुरूप है। इस पृष्ठ पर नीचे चुनी गई गणना पद्धति के अनुसार 2026 में हर पौष की सूची नई दिल्ली के लिए आरंभ और समाप्ति तिथियों सहित दी गई है।

ऋतु: हेमंत
अनुमानित ग्रेगोरियन: दिसंबर-जनवरी

अमांत मास अमावस्या से अमावस्या तक चलते हैं (दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित); पूर्णिमांत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलते हैं (उत्तर भारत में प्रचलित) — दोनों पद्धतियां एक ही दिन को अलग-अलग नाम दे सकती हैं।

पौष मास के बारे में

नक्षत्र
पुष्य
ऋतु
हेमंत
अनुमानित ग्रेगोरियन
दिसंबर-जनवरी
अवधि
लगभग 29.5 दिन

नाम का स्रोत: पुष्य नक्षत्र से नामित, जिसमें इस मास की पूर्णिमा पड़ती है

पौष हेमंत ऋतु का दूसरा मास और उत्तर भारतीय वर्ष का सबसे ठंडा काल है। इसका लगभग पूरा भाग धनुर्मास के साथ पड़ता है — वह अवधि जब सूर्य धनु राशि में रहता है — जिसमें विवाह, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे संस्कार टाल दिए जाते हैं। इसीलिए बोलचाल में पौष को कभी-कभी मल मास या खर मास कहा जाता है।

फिर भी यह मास स्वयं में अशुभ नहीं है: यह कर्मकांड के स्थान पर उपासना को समर्पित है। सूर्य इसके अधिष्ठाता देव हैं, और नित्य सूर्य नमस्कार, सूर्योदय पर अर्घ्य तथा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ इसके विशिष्ट कर्म हैं।

पौष अमावस्या वर्ष के प्रमुख पितृ तर्पण दिवसों में से एक है, और पौष पूर्णिमा से प्रयागराज का माघ मेला आरंभ होता है, जहाँ कल्पवास — संगम तट पर एक मास का तप — प्रारंभ होता है। कुंभ के वर्षों में इसके पहले प्रमुख स्नान पर्व यहीं पड़ते हैं।

पौष के प्रमुख पर्व

  • सफला एकादशीकृष्ण एकादशी
  • पौष अमावस्या (पितृ तर्पण)कृष्ण अमावस्या
  • पौष पुत्रदा एकादशीशुक्ल एकादशी
  • शाकंभरी जयंतीपौष पूर्णिमा
  • पौष पूर्णिमा / माघ मेला और कल्पवास आरंभपौष पूर्णिमा

पर्व तिथि और पक्ष से दिए गए हैं, ग्रेगोरियन तिथि से नहीं — ग्रेगोरियन तिथि प्रतिवर्ष बदलती है। ऊपर दी गई सूची से किसी भी दिन का दैनिक पंचांग खोला जा सकता है।

पौष में क्या किया जाता है

  • उगते सूर्य को जल और लाल पुष्प से अर्घ्य
  • आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्याष्टक का पाठ
  • तिल, गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र और ईंधन का दान
  • पौष पूर्णिमा से प्रयागराज में कल्पवास का आरंभ

पौष मास के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका कारण चंद्र मास नहीं, सूर्य की स्थिति है। पौष के अधिकांश भाग में सूर्य धनु राशि में रहता है, जिसे धनुर्मास या खरमास कहते हैं, और मुहूर्त ग्रंथ इस अवधि में संस्कार — विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश आदि — वर्जित बताते हैं। यह विराम मकर संक्रांति पर हटता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। धनुर्मास सौर है और पौष चंद्र, इसलिए दोनों एक-दूसरे पर पड़ते तो हैं पर पूरी तरह मेल नहीं खाते।